IGIMS में आयुष्मान योजना में बड़ा घोटाला ! बिना उपचार के ही आयुष्मान कार्ड से लाखों उड़ाया, करोड़ों की वित्तीय अनियमितता

इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में एक मरीज की शिकायत से शुरू हुई जांच में आरोप सामने आया कि उसके अस्पताल आए बिना ही उसके नाम पर आयुष्मान योजना के तहत इलाज का क्लेम कर दिया गया।

IGIMS Patna Ayushman Bharat Scam
IGIMS Patna Ayushman Bharat Scam- फोटो : news4nation

IGIMS Ayushman Bharat Scam : पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज और क्लेम की प्रक्रिया को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। एक मरीज की शिकायत से शुरू हुई जांच में आरोप सामने आया कि उसके अस्पताल आए बिना ही उसके नाम पर आयुष्मान योजना के तहत इलाज का क्लेम कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद संस्थान ने कार्रवाई करते हुए आयुष्मान योजना के मुख्य नोडल अधिकारी डॉ. जीऊत राम केसरी को पद से हटा दिया है, जबकि चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।


मरीज की शिकायत से खुला मामला

जानकारी के मुताबिक, करीब पांच महीने पहले एक मरीज ने शिकायत की थी कि उसके नाम और आयुष्मान कार्ड का इस्तेमाल कर इलाज का क्लेम किया गया, जबकि उसने IGIMS में इलाज नहीं कराया था। शिकायत के बाद अस्पताल प्रशासन ने आंतरिक जांच शुरू की। जांच में करीब 45 लाख रुपये के कथित फर्जी क्लेम का मामला सामने आया। 


जांच में अस्पताल की आउटसोर्सिंग एजेंसी से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई। आरोप है कि हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम में मरीजों के रिकॉर्ड और दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर क्लेम की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। मामले में FIR दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।


CAG ने 13.89 करोड़ के राजस्व नुकसान पर मांगा जवाब

IGIMS में आयुष्मान योजना को लेकर पहले भी वित्तीय सवाल उठ चुके हैं। CAG की ओर से 28 नवंबर 2025 को IGIMS निदेशक को भेजे गए पत्र में 13 करोड़ 89 लाख 47 हजार 358 रुपये के राजस्व नुकसान का उल्लेख किया गया था। बताया गया कि कई मरीजों का इलाज होने के बावजूद निर्धारित समय पर आयुष्मान योजना के तहत क्लेम नहीं किया गया, जिससे संस्थान को आर्थिक नुकसान हुआ। इस मामले में CAG ने अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगा था।


अब हर शुक्रवार होगी क्लेम की समीक्षा

मामले के बाद IGIMS प्रशासन ने आयुष्मान योजना की निगरानी के लिए नई समिति गठित की है। समिति की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक करेंगे। अब हर शुक्रवार शाम चार बजे आयुष्मान योजना से जुड़े किसी एक क्लेम और संबंधित मरीज के रिकॉर्ड की समीक्षा की जाएगी।


नई व्यवस्था के तहत छह स्तरों पर निगरानी की जाएगी—मरीज के भर्ती से डिस्चार्ज तक के रिकॉर्ड का मिलान, समय पर क्लेम दर्ज हुआ या नहीं इसकी जांच, हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम और आयुष्मान पोर्टल के डेटा का मिलान, मरीज का वास्तविक सत्यापन, आउटसोर्सिंग कर्मियों की गतिविधियों की निगरानी और लंबित क्लेम व सरकारी फंड का वित्तीय ऑडिट।


IGIMS के उप निदेशक डॉ. विभूति प्रसाद सिन्हा ने इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य पात्र मरीजों को समय पर बेहतर इलाज उपलब्ध कराना और योजना के संचालन को व्यवस्थित रखना है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित फर्जी क्लेम में कौन-कौन लोग शामिल थे और वित्तीय अनियमितताओं की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।