बायोमेट्रिक फेल होने का बहाना अब नहीं चलेगा: मुफ़्त राशन के लिए सरकार लाई डिजिटल फूड कूपन, राशन माफियाओं में हड़कंप
सरकार अगले महीने चंडीगढ़, पुडुचेरी और गुजरात के तीन जिलों—आनंद, साबरमती और दाहोद में डिजिटल फूड करेंसी का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेगी। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य दुनिया के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम की व्यवहार्यता और कार्यक्षमता को परखना है।
N4N Desk - मुफ्त राशन योजना में पारदर्शिता लाने और लाभार्थियों की सुविधा के लिए सरकार एक क्रांतिकारी बदलाव करने जा रही है। अगले महीने से चंडीगढ़, पुडुचेरी और गुजरात के कुछ हिस्सों में डिजिटल फूड करेंसी (CBDC) का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा।
मुफ्त राशन के लिए डिजिटल फूड करेंसी का आगाज
केंद्र सरकार अगले महीने से गुजरात के तीन जिलों (आनंद, साबरमती और दाहोद) के साथ-साथ चंडीगढ़ और पुडुचेरी में सीमित लाभार्थियों के लिए डिजिटल फूड करेंसी का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने वाली है। इस पहल के तहत, लाभार्थियों को उनके मोबाइल फोन पर RBI-इनेबल्ड डिजिटल वॉलेट में डिजिटल फूड कूपन दिए जाएंगे। ये कूपन सीधे उनके फोन पर पहुंचेंगे, जिससे राशन वितरण की प्रक्रिया अधिक आधुनिक और पारदर्शी हो जाएगी।
QR कोड स्कैन करते ही मिलेगा अनाज
इस नई व्यवस्था में लाभार्थियों को अब लंबी कतारों या बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन (अंगूठे के निशान) की तकनीकी खराबी जैसी समस्याओं से जूझना नहीं पड़ेगा। वे राशन की दुकानों पर उपलब्ध दुकानदार के क्यूआर (QR) कोड को स्कैन करके अपने डिजिटल कूपन को रिडीम कर सकेंगे और अपना हक का मुफ्त अनाज ले पाएंगे। सरकार ने यह भी योजना बनाई है कि इन डिजिटल कूपन के इस्तेमाल के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की जाएगी ताकि कूपन जमा न किए जा सकें और उनका ससमय उपयोग सुनिश्चित हो।
सॉफ्ट लॉन्चिंग के दौरान मिले उत्साहजनक परिणाम
इस योजना का व्यापक स्तर पर विस्तार करने से पहले अहमदाबाद में 25 लाभार्थियों के साथ एक सॉफ्ट लॉन्च किया गया था। इस परीक्षण के परिणाम काफी सफल रहे हैं। राज्य सरकार के एक अधिकारी के अनुसार, सॉफ्ट लॉन्चिंग से अब तक लगभग 2,000 ट्रांजैक्शन सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं, जो इस डिजिटल प्रणाली की व्यवहार्यता और कार्यक्षमता को प्रमाणित करते हैं।
सब्सिडी का सही उद्देश्य होगा सुनिश्चित
अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल फूड करेंसी यह सुनिश्चित करने का सबसे सटीक जरिया है कि सरकारी सब्सिडी का इस्तेमाल केवल अनाज खरीदने के लिए ही हो। चंडीगढ़ और पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में, जहाँ 2015 से अनाज के बदले सीधे कैश ट्रांसफर (DBT) की व्यवस्था लागू है, वहां भी अब डिजिटल करेंसी के जरिए अनाज बांटने के लिए विशेष आउटलेट्स की पहचान की जा रही है। इन केंद्रों पर अनाज की आपूर्ति फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) या राज्य की एजेंसियों द्वारा की जाएगी।
पारदर्शिता और गड़बड़ी पर लगाम
इस योजना का मुख्य उद्देश्य दुनिया के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम में भ्रष्टाचार को रोकना और पारदर्शिता को बढ़ावा देना है। डिजिटल फूड करेंसी के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि अनाज का वितरण बिना किसी बिचौलिए या गड़बड़ी के सीधे पात्र व्यक्ति तक पहुंचे। यह कदम राशन कार्ड धारकों को बायोमेट्रिक की परेशानियों से मुक्ति दिलाने के साथ-साथ पूरे सिस्टम की निगरानी को भी आसान बना देगा।
फीचर फोन यूजर्स के लिए भी होगा विकल्प
सरकार इस बात पर भी गंभीरता से विचार कर रही है कि जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है, वे इस सुविधा का लाभ कैसे उठाएं। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे लाभार्थियों के लिए विकल्प तलाशे जा रहे हैं जो बेसिक या फीचर फोन का उपयोग करते हैं। लक्ष्य यह है कि स्मार्टफोन न होने की स्थिति में भी डिजिटल फूड करेंसी का उपयोग संभव हो सके, ताकि समाज का हर वर्ग इस डिजिटल बदलाव का हिस्सा बन सके।