LPG price India: LPG रेट अपडेट! आज भी नहीं मिली राहत, कीमतें स्थिर लेकिन जेब पर बोझ जारी
LPG price India: देशभर में एलपीजी की कीमतें स्थिर हैं। जानें घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के ताजा रेट, अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर और कीमतों में बदलाव की वजह।
LPG price India: देशभर में एलपीजी (गैस सिलेंडर) की कीमतें अभी फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। 14.2 किलो वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में आखिरी बार 7 जून को 29 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी, जिसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत 942 रुपये हो गई थी। इसके बाद से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में आखिरी बार 1 जून को 42 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी और तब से इसके दाम भी स्थिर हैं।
अलग-अलग शहरों में घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतें इस प्रकार हैं। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर 942 रुपये और कमर्शियल 3113.5 रुपये है। मुंबई में घरेलू 941.5 रुपये और कमर्शियल 3067.5 रुपये है। कोलकाता में घरेलू 968 रुपये और कमर्शियल 3256 रुपये है। चेन्नई में घरेलू 957.5 रुपये और कमर्शियल 3283 रुपये है। बेंगलुरु में घरेलू 944.5 रुपये और कमर्शियल 3198 रुपये है। अमृतसर में घरेलू 983 रुपये और कमर्शियल 3220 रुपये है। नोएडा और गाजियाबाद में घरेलू 939.50 रुपये और कमर्शियल 3113.50 रुपये है। पटना में घरेलू 1031.5 रुपये और कमर्शियल 3400.5 रुपये है।
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव
भारत अपनी जरूरत का 60 प्रतिशत से ज्यादा एलपीजी दूसरे देशों से आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव का असर सीधे भारत की कीमतों पर पड़ता है। भारत में एलपीजी की कीमतें ‘सऊदी अरामको कॉन्ट्रैक्ट प्राइस’ के आधार पर तय होती हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव की वजह से फरवरी के बाद से इस वैश्विक कीमत में लगभग 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य में समस्या आने से सप्लाई पर भी असर पड़ा है। इसी कारण भारत में एलपीजी का आयात अप्रैल में घटकर 6.96 लाख टन रह गया, जबकि सामान्य तौर पर यह लगभग 20 लाख टन प्रति महीना होता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बावजूद घरेलू एलपीजी की कीमतों में तुरंत गिरावट की संभावना नहीं है। इसमें कम से कम 3 से 6 महीने का समय लग सकता है।अभी अंतरराष्ट्रीय कीमतों के हिसाब से एक सिलेंडर की असली लागत करीब 1600 रुपये पड़ती है, लेकिन भारत में उपभोक्ताओं को यह लगभग 942 रुपये में मिल रहा है। यानी बाकी का खर्च तेल कंपनियां खुद उठा रही हैं। इसी वजह से तेल कंपनियों को इस वित्त वर्ष में करीब 60,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान होने का अनुमान है। जब तक अंतरराष्ट्रीय कीमतें कम नहीं होतीं और नुकसान कम नहीं होता, तब तक एलपीजी की कीमतों में बड़ी कटौती की संभावना कम है।