Bihar Police:शाहपुर थानेदार समेत कई पुलिसकर्मी सस्पेंड, पुलिस पर पिस्तौल तनी, फिर एनकाउंटर... महकमे में मचा हड़कंप
Bihar Police: भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौंटी गांव में पुलिस की कार्रवाई के दौरान हुए हाई-वोल्टेज ड्रामे ने पूरे पुलिस महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश कुमार मलाकार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।
Bihar Police: भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौंटी गांव में पुलिस की कार्रवाई के दौरान हुए हाई-वोल्टेज ड्रामे ने पूरे पुलिस महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। भोजपुर के आरा में भरत तिवारी एनकाउंटर मामला अब पुलिस और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।पुलिस टीम के सामने एक युवक द्वारा खुलेआम पिस्तौल तानने और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शाहाबाद प्रक्षेत्र के डीआईजी डॉ. सत्यप्रकाश ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश कुमार मलाकार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।मामले की जांच में ड्यूटी के दौरान गंभीर लापरवाही, सुस्ती और कर्तव्यहीनता सामने आने की बात कही गई है। भोजपुर एसपी राज की अनुशंसा पर यह कार्रवाई की गई। साथ ही मौके पर तैनात एक सब इंस्पेक्टर और एक सिपाही को भी निलंबित कर दिया गया है। कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में खलबली मची हुई है।
एकतरफ पुलिस मुठभेड़ को कानून-व्यवस्था से जुड़ी कार्रवाई बता रही है, तो दूसरी तरफ परिजन और स्थानीय लोग इसे फर्जी एनकाउंटर करार देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। विवाद के बीच शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार पर गाज गिर गई है। कर्तव्य में लापरवाही और स्थिति को समय रहते नियंत्रित नहीं कर पाने के आरोप में उन्हें निलंबित कर दिया गया है।पुलिस अधीक्षक राज के अनुसार, भरत तिवारी द्वारा पुलिसकर्मियों पर पिस्टल तानने और धमकी देने का वीडियो वायरल होने के बावजूद थानाध्यक्ष ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। हालात को संभालने में विफल रहने को गंभीर लापरवाही मानते हुए डीआईजी के स्तर से निलंबन की कार्रवाई की गई। सूत्रों के मुताबिक एक दारोगा, एक एएसआई और कुछ सिपाहियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।इधर भरत तिवारी की मौत के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया है। गुरुवार को सैकड़ों लोगों ने शव के साथ आर-बक्सर फोरलेन एनएच-922 को जाम कर दिया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने अपना हथियार डाल दिया था, इसके बावजूद उस पर गोलियां चलाई गईं।
मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके बेटे ने पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दिया था। उनका दावा है कि हथियार फेंकने के बाद भी पुलिस ने उसे चार गोलियां मार दीं। परिजनों का कहना है कि घायल अवस्था में उसे बेहतर चिकित्सा सुविधा समय पर नहीं मिली, जिसके कारण बाद में पीएमसीएच में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि वायरल वीडियो में दिखाई गई घटनाओं के बावजूद स्थानीय स्तर पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? और यदि आत्मसमर्पण के बाद गोली चलने के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला और गंभीर हो सकता है।
दरअसल, बिलौंटी गांव में भरत भूषण तिवारी के अवैध हथियार लहराने की सूचना पर पुलिस टीम दबिश देने पहुंची थी। लेकिन जिस शख्स को कानून का शिकंजा पहनाना था, उसने उल्टे पुलिस टीम को ही निशाने पर ले लिया। वायरल वीडियो में युवक पुलिसकर्मियों के सामने पिस्तौल लहराते और उन्हें धमकाते दिखाई दिया। इस दौरान पुलिस की कार्यशैली और मौके पर मौजूद जवानों की प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठे।
वीडियो सामने आने के बाद मामला सीधे पुलिस मुख्यालय तक पहुंच गया। जांच में यह देखा गया कि हालात बेकाबू होने के बावजूद पुलिस की ओर से अपेक्षित सतर्कता और त्वरित कार्रवाई नहीं की गई। इसी आधार पर विभागीय कार्रवाई की तलवार चली।इस पूरे घटनाक्रम का अंत बाद में पुलिस और आरोपी के बीच हुई मुठभेड़ में हुआ, जहां भरत भूषण तिवारी को गोली लगी और उसकी मौत हो गई। लेकिन अब चर्चा सिर्फ एनकाउंटर की नहीं, बल्कि उस वायरल वीडियो की है जिसने पुलिस व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस महकमे में यह मामला फिलहाल चर्चा का सबसे गर्म मुद्दा बना हुआ है।
रिपोर्ट- आशीष कुमार