Bihar Crime: घूस का सिंडिकेट बेनकाब, बांका जिला परिषद में निगरानी का बड़ा धावा, अध्यक्ष समेत 7 पर FIR, 1.26 लाख रिश्वत के साथ दो गिरफ्तार

Bihar Crime: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बांका जिला परिषद में कथित तौर पर चल रहे 'घूस के संगठित सिंडिकेट' का पर्दाफाश किया । ...

घूस का सिंडिकेट बेनकाब- फोटो : social Media

Bihar Crime: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बांका जिला परिषद में कथित तौर पर चल रहे 'घूस के संगठित सिंडिकेट' का पर्दाफाश किया । ब्यूरो ने जिला परिषद अध्यक्ष राजेंद्र यादव, सहायक अभियंता सुधीर कुमार, कनीय अभियंता मगरूफ, कार्यालय के निजी सहायक ओमप्रकाश मंडल, रात्रि प्रहरी जागेश्वर मंडल तथा दो अन्य गैर-लोकसेवकों समेत सात लोगों के खिलाफ कांड संख्या 90/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। कार्रवाई के दौरान ओमप्रकाश मंडल और जागेश्वर मंडल को 1.26 लाख रुपये की कथित रिश्वत राशि के साथ रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।

यह कार्रवाई धोरैया के फतुचक निवासी अवध किशोर कुमार की शिकायत के बाद हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नाला और पीसीसी सड़क निर्माण का भुगतान करने के एवज में रिश्वत की मांग की जा रही है। निगरानी की जांच में प्रथम दृष्टया यह सामने आया कि सरकारी और गैर-सरकारी लोगों की मिलीभगत से कथित तौर पर योजनाओं के भुगतान के बदले रिश्वत वसूली जा रही थी।

जांच के दौरान यह भी आरोप सामने आया कि सेवानिवृत्त कनीय अभियंता ओमप्रकाश मंडल और उनके करीबी रिश्तेदार जागेश्वर मंडल, जो रात्रि प्रहरी के पद पर कार्यरत हैं, जिला परिषद कार्यालय में वर्षों से प्रभावशाली भूमिका निभा रहे थे। स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, योजनाओं की मेजरमेंट बुक तैयार करने से लेकर तकनीकी स्वीकृति, फाइलों की निगरानी और अंतिम भुगतान तक की प्रक्रिया में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

आरोप यह भी है कि टेंडर से जुड़े कार्यों में संवेदकों से कथित कमीशन वसूलकर विभिन्न स्तरों तक राशि पहुंचाई जाती थी। निगरानी की छापेमारी के बाद बांका जिला परिषद कार्यालय और आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया। देर शाम डीएसपी सत्येंद्र राम के नेतृत्व में टीम दोनों गिरफ्तार आरोपियों को पटना लेकर रवाना हो गई।अब इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई के बाद निगाहें आगे की जांच पर हैं। यदि आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला बिहार में सरकारी योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार के सबसे चर्चित मामलों में से एक बन सकता है।