Bihar News: बिहार के आवासीय विद्यालयों में घोटाले की बू! डिप्टी डायरेक्टर की दबिश से मचा हड़कंप, रोटी मशीन से लेकर मेंटेनेंस तक पर उठे सवाल
Bihar News:बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब विभाग के डिप्टी डायरेक्टर राणा बैद्यनाथ सिंह ने एससी-एसटी आवासीय विद्यालयों में व्याप्त अनियमितताओं की शिकायत पर जिले में औचक जांच की।...
Bihar News:बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब विभाग के डिप्टी डायरेक्टर राणा बैद्यनाथ सिंह ने एससी-एसटी आवासीय विद्यालयों में व्याप्त अनियमितताओं की शिकायत पर जिले में औचक जांच की। बिहार सरकार समाज कल्याण विभाग की टीम मुजफ्फरपुर से पहुंची और एक-एक रजिस्टर, स्टॉक और निर्माण कार्य की पड़ताल शुरू कर दी।
सबसे पहले टीम गौनाहा प्रखंड के बेलसंडी स्थित एससी-एसटी आवासीय विद्यालय पहुंची। यहां स्टॉक रजिस्टर, उपस्थिति पंजिका और आपूर्ति सामग्री की बारीकी से जांच की गई। कंबल, पंखा और लाखों की लागत से आई रोटी मशीन की गुणवत्ता पर सवाल उठे। बगल में बन रहे निर्माणाधीन भवन का भी मुआयना किया गया। इस दौरान एचएम, जिला कल्याण पदाधिकारी अमित भास्कर और बीडब्लूओ के साथ बैठक कर सख्त निर्देश दिए गए कि किसी भी सूरत में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसके बाद टीम मैनाटांड़ प्रखंड के भिरभिरिया स्थित आवासीय विद्यालय पहुंची। यहां पहले से लंबित शिकायतों की फाइलें खंगाली गईं। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 8 मार्च को ज्ञापांक 54 के तहत तिरहुत प्रमंडल से व्यापक अनियमितताओं पर जवाब तलब किया गया था।
मामले में एक और संगीन पहलू तब सामने आया जब बेलसंडी विद्यालय के तत्कालीन नाइट गार्ड सत्येंद्र कुमार की पत्नी उषा देवी ने डीएम सहित उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि उनके पति से फर्जी विपत्रों पर जबरन हस्ताक्षर कराने का दबाव बनाया गया। मना करने पर उन्हें हटा दिया गया। यह इल्जाम पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है।
इसी कड़ी में मैनाटांड़ स्थित एकलव्य मॉडल आवासीय उच्च विद्यालय बेलाटाड़ी में टोटल मेंटेनेंस के नाम पर पांच साल तक संवेदक द्वारा कार्य कराने की शर्त थी, मगर आरोप है कि बिना काम कराए ही विपत्र भेजकर राशि की निकासी कर ली गई। दिलचस्प यह कि संबंधित कर्मी का तबादला मधुबनी हो चुका है, बावजूद इसके तीन वर्षों से पश्चिम चम्पारण में डिपुटेशन पर जमे हैं।
करीब पंद्रह दिन पहले बगहा-दो स्थित डॉक्टर भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालय सिंधाव में भी ग्रामीणों की शिकायत पर जांच हुई थी। लाखों की रोटी मशीन बंद पड़ी मिली, बेंच-डेस्क की बिना टूटे मरम्मत दिखाकर राशि निकासी पर हैरत जताई गई। बच्चों ने भी कबूल किया कि अधिकारियों के आने पर ही अच्छा भोजन मिलता है, अन्य दिनों में अधपका खाना परोसा जाता है।
डिप्टी डायरेक्टर राणा बैद्यनाथ सिंह ने स्पष्ट कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुविधाएं देना सरकार की प्राथमिकता है। अब देखना है कि इस जांच की आंच में कितने चेहरे बेनकाब होते हैं और क्या वाकई दोषियों पर शिकंजा कसता है या फिर फाइलों में मामला दफन हो जाता है।
रिपोर्ट- आशीष कुमार