Bihar Cyber Crime: 12 घंटे में 2 लाख रुपये लोन का झांसा, बिहार के नवगछिया में महिलाओं से लाखों की ठगी; 5 गिरफ्तार
Bihar Cyber Crime: नवगछिया में 12 घंटे में 2 लाख रुपये लोन दिलाने का झांसा देकर महिलाओं से लाखों रुपये की ठगी करने वाले अंतरजिला साइबर गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया। पांच आरोपी गिरफ्तार, नौ की तलाश जारी।
Bihar Cyber Crime: बिहार के नवगछिया में महिलाओं को कम समय में बड़ा व्यवसायिक ऋण दिलाने का लालच देकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक संगठित अंतरजिला साइबर गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गिरोह ने राष्ट्रीय राजमार्ग-31 के किनारे एक अर्धनिर्मित भवन में फर्जी फाइनेंस कंपनी का कार्यालय खोल रखा था और खुद को अधिकृत वित्तीय संस्था का प्रतिनिधि बताकर महिलाओं को अपने जाल में फंसा रहा था।
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह की ठगी का शिकार 100 से अधिक महिलाएं हो सकती हैं। फिलहाल 22 महिलाओं की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि नौ अन्य आरोपितों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।
12 घंटे के भीतर 2 लाख लोन देने का लालच
मामले की जानकारी देते हुए वैभव शर्मा ने बताया कि एनएच-31 स्थित संतोष धर्मकांटा के पास संचालित IBL फाइनेंस लिमिटेड नाम की कथित कंपनी के कर्मचारियों ने ग्रामीण महिलाओं को भरोसा दिलाया था कि यदि वे 10-10 हजार रुपये जमा करेंगी तो केवल 12 घंटे के भीतर उन्हें 2 लाख रुपये का व्यवसायिक ऋण मिल जाएगा। इसी लालच में महिलाओं से नकद और ऑनलाइन माध्यम से पैसे जमा करवाए गए। बाद में जब किसी को ऋण नहीं मिला तो उन्हें ठगी का एहसास हुआ और मामला पुलिस तक पहुंचा।
पुलिस को मिला क्यूआर स्कैनर
जांच के दौरान पुलिस को एक महत्वपूर्ण सुराग क्यूआर स्कैनर से मिला। तकनीकी जांच में पता चला कि महिलाओं द्वारा जमा की जा रही रकम का बड़ा हिस्सा एक क्यूआर कोड के जरिए उषा जनरल स्टोर के खाते में भेजा जा रहा था। इसी आधार पर पुलिस मधेपुरा पहुंची और दुकान संचालिका उषा देवी को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने अपने बेटे और गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी दी। इसके बाद सहरसा, मधेपुरा, कटिहार और पूर्णिया में छापेमारी कर अन्य आरोपितों को पकड़ा गया।
आरोपी 8 से 9 दिनों से नवगछिया में सक्रिय थे
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पिछले 8 से 9 दिनों से नवगछिया में सक्रिय थे। उन्होंने किराये के भवन में बाकायदा कार्यालय खोला था। वहां फर्जी दस्तावेज, बैनर और प्रचार सामग्री लगाकर खुद को बैंक और फाइनेंस कंपनी का अधिकृत प्रतिनिधि बताया जाता था। महिलाओं को कार्यालय बुलाकर भरोसा दिलाया जाता और फिर रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग फीस या सुरक्षा राशि के नाम पर 10 हजार रुपये जमा करवा लिए जाते थे। पुलिस के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में करीब 13 लोग शामिल थे। गिरफ्तार आरोपितों में संतोष कुमार, रतन कुमार, सुशांत कुमार, लकी कुमारऔर उषा देवी शामिल हैं।
आरोपितों के पास से पुलिस को क्या मिला?
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपितों के पास से 8 मोबाइल फोन, 12 सिम कार्ड, एक स्कैनर, 10 हजार रुपये नकद, एक मोटरसाइकिल, फर्जी दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण कागजात बरामद किए हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपी लगातार सिम कार्ड बदलकर अपनी पहचान छिपाने और जांच को भटकाने की कोशिश करते थे। एसपी वैभव शर्मा ने आशंका जताई है कि यह गिरोह पहले भी अन्य जिलों में इसी तरह की ठगी कर चुका हो सकता है। पुलिस अब आरोपितों के मोबाइल फोन, बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की गहन जांच कर रही है ताकि उनके पुराने नेटवर्क और आपराधिक इतिहास का पता लगाया जा सके।
भवन के मालिक की भूमिका भी जांच के दायरे में
इस मामले में उस भवन के मालिक की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है, जहां फर्जी फाइनेंस कंपनी का कार्यालय चलाया जा रहा था। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि भवन मालिक को इन गतिविधियों की जानकारी थी या नहीं। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि कम समय में बड़ा लोन, पैसा दोगुना करने या आसान कमाई जैसी योजनाओं के झांसे में न आएं। किसी भी संस्था में पैसा जमा करने से पहले उसकी वैधता और पंजीकरण की पूरी जांच जरूर करें। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधी अब गांवों तक पहुंच चुके हैं और लोगों के भरोसे का फायदा उठाकर नए-नए तरीकों से ठगी कर रहे हैं।
रिपोर्ट - अंजनी कुमार कश्यप