Bihar Police:थानेदार पर केस दर्ज, चरस कांड में ईंट के खेल का अदालत में खुला राज, पुलिस मुख्यालय के निर्णय से विभाग में हड़कंप
Bihar Police: सूबे में मादक पदार्थ बरामदगी के नाम पर खेले गए एक सनसनीखेज खेल ने पुलिस महकमे की साख पर गहरा दाग लगा दिया है। ....
Bihar Police: सूबे में मादक पदार्थ बरामदगी के नाम पर खेले गए एक सनसनीखेज खेल ने पुलिस महकमे की साख पर गहरा दाग लगा दिया है। चरस की जब्ती दिखाकर दर्ज किए गए मुकदमे में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब अदालत में पेशी के दौरान सीलबंद पैकेट खोला गया और उसमें नशीले पदार्थ की जगह ईंटें बरामद हुईं। इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद पुलिस मुख्यालय के हुक्म पर आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने पूर्व जीआरपी-आरपीएफ थानेदार समेत नौ लोकसेवकों के खिलाफ प्राथमिक दर्ज कर ली है।
यह पूरा मामला पूर्वी चंपारण जिले के सुगौली रेल थाना कांड संख्या 04/25 से ताल्लुक रखता है। मार्च 2025 में सुगौली जीआरपी ने भारी मात्रा में चरस बरामद करने का दावा किया था और इसे बड़ी कामयाबी बताकर प्रचारित भी किया गया। मगर दो महीने बाद जब जब्त माल को अदालत में पेश किया गया, तो हकीकत का परदा फाश हो गया। पैकेट के भीतर ईंट मिलने से न्यायिक गलियारों से लेकर पुलिस लाइन तक सनसनी फैल गई।
मामले की नजाकत को देखते हुए त्रिस्तरीय जांच कमेटी गठित की गई। इस समिति में मोतिहारी के एडीएम शैलेंद्र कुमार भारती, समस्तीपुर के आरपीएफ कमांडेंट शेख जन अहमद जानी और मुजफ्फरपुर रेल एसपी बीणा कुमारी शामिल थे। जांच रिपोर्ट में जब्ती सूची की प्रक्रिया को संदिग्ध ठहराया गया और अधिकारियों की भूमिका पर संगीन सवाल उठाए गए। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि सभी नौ अभियुक्तों ने आपसी सांठगांठ से आपराधिक साजिश रची और न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह करने की कोशिश की।
एफआईआर में तत्कालीन सुगौली जीआरपी थानाध्यक्ष, आरपीएफ ओपी प्रभारी, सिपाही, अनुसंधान पदाधिकारी और संबंधित दंडाधिकारी के नाम शामिल हैं। इल्ज़ाम है कि झूठे साक्ष्य गढ़कर केस को मजबूत दिखाने की कवायद की गई।
इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में खलबली मची हुई है। बिहार पुलिस के अंदरूनी हलकों में जवाबदेही को लेकर बहस तेज है। अब आर्थिक अपराध इकाई तहकीकात को अंजाम दे रही है और दोष साबित होने पर सख्त कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी में है।
रिपोर्ट- कुलदीप भारद्वाज