Bihar Salary Scam:वेतन घोटाले का खुला ऐसा राज कि शिक्षक लौटाने लगे पैसे, सरकारी खजाने में जमा हुए 1 करोड़ से ज्यादा रुपये
Bihar Salary Scam:मोतिहारी शिक्षा विभाग में 60 लाख का वेतन घोटाला! दो दिनों में शिक्षकों ने लौटाए 1 करोड़ से ज्यादा रुपये, दोहरे वेतन और एरियर की रकम वापस करने के लिए लगी लंबी कतार
Bihar Salary Scam: बिहार के मोतिहारी शिक्षा विभाग में 60 लाख रुपये के कथित वेतन घोटाले ने ऐसा भूचाल मचाया है कि अब अधिक वेतन और एरियर पाने वाले शिक्षक भी परेशान हैं। सरकारी खजाने से निकली अतिरिक्त रकम वापस करने के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में शिक्षकों की लंबी कतार लग रही है। हैरानी की बात यह है कि महज दो दिनों में शिक्षकों और कर्मियों ने एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि विभाग को वापस कर दी है। वापसी का सिलसिला अब भी जारी है। सवाल उठ रहा है कि आखिर किसकी मिलीभगत से एक ही शिक्षक के खाते में दो-दो बार वेतन और हजारों रुपये का अतिरिक्त एरियर पहुंच गया?
HRMS में फर्जीवाड़े से खुला वेतन घोटाले का खेल
दरअसल, मोतिहारी शिक्षा विभाग में HRMS प्रणाली में कथित फर्जीवाड़ा कर करीब 60 लाख रुपये के वेतन घोटाले का मामला सामने आया था। आरोप है कि मृत, त्यागपत्र दे चुके और सेवानिवृत्त शिक्षकों के नाम पर वेतन की निकासी की गई। इस मामले में डीपीओ कार्यालय में प्रतिनियुक्त मदरसा शिक्षक और डाटा ऑपरेटर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। जांच आगे बढ़ने के साथ ही जिला शिक्षा कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। आरडीडीई की जांच के बाद मेकर और चेकर की भूमिका निभाने वाले तीन कर्मियों को निलंबित किया जा चुका है। वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव सीके अनिल के निर्देश पर अधिक और दोहरा वेतन तथा एरियर उठाने वाले शिक्षकों एवं कर्मियों को अतिरिक्त राशि वापस करने को कहा गया है।
चार-पांच महीने का वेतन दोबारा खाते में पहुंचा
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, नियोजित से विशिष्ट शिक्षक बने कई शिक्षकों के बैंक खातों में चार से पांच महीने तक का अतिरिक्त वेतन पहुंच गया। वहीं, एरियर भुगतान में भी कथित तौर पर 50 हजार से 90 हजार रुपये तक की अतिरिक्त राशि भेज दी गई। अब शिक्षक अपनी जेब से यह रकम वापस करने के लिए विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।सूत्रों का दावा है कि दो दिनों में एक करोड़ रुपये से अधिक की रकम वापस की जा चुकी है। यह आंकड़ा शुरुआती 60 लाख रुपये के घोटाले से भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
पुलिस ने घोषित किया 20 हजार का इनाम
उधर, मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। एसपी ने दोनों नामजद कर्मियों पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। साइबर डीएसपी ने DEO कार्यालय पहुंचकर तकनीकी और वैज्ञानिक तरीके से जांच की है। डीएम द्वारा गठित तीन सदस्यीय टीम भी कर्मियों की भूमिका और भुगतान से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
2024 से चल रहा था खेल, किसका था संरक्षण?
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि 2024 से ही वेतन घोटाले का खेल चल रहा था तो इतने लंबे समय तक किसी अधिकारी या कर्मचारी को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? HRMS में भुगतान की प्रक्रिया को किसने मंजूरी दी? मृत और सेवानिवृत्त शिक्षकों के नाम पर सरकारी राशि कैसे निकलती रही?चर्चा यह भी है कि निलंबित कर्मियों की अर्जित संपत्ति की जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस, प्रशासन और शिक्षा विभाग की अलग-अलग जांच जारी है। जांच के नतीजों से ही इस कथित घोटाले के असली सूत्रधार और संरक्षण देने वालों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
रिपोर्ट- हिमांशु कुमार