बिहार में वंदे भारत पर फिर हमला, सुगौली के पास हुई पत्थरों की बरसात, सी-4 कोच का शीशा चकनाचूर, यात्रियों के बीच अफरा-तफरी

Bihar Vande Bharat Stone Pelting:सुगौली स्टेशन से ट्रेन खुलने के कुछ ही मिनट बाद अज्ञात अराजक तत्वों ने चलती ट्रेन पर पत्थरों की बौछार कर दी। ...

बिहार में वंदे भारत पर फिर हमला- फोटो : social Media

Bihar Vande Bharat Stone Pelting: बिहार में एक बार फिर देश की हाईस्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस असामाजिक तत्वों के निशाने पर आ गई। सुगौली स्टेशन से ट्रेन खुलने के कुछ ही मिनट बाद अज्ञात अराजक तत्वों ने चलती ट्रेन पर पत्थरों की बौछार कर दी। इस दुस्साहसिक वारदात में पत्थर सीधे सी-4 कोच पर जा लगा, जिससे खिड़की का शीशा चकनाचूर हो गया। अचानक हुए इस हमले से डिब्बे में बैठे यात्रियों के बीच अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया। गनीमत रही कि इस वारदात में कोई यात्री जख्मी नहीं हुआ और ट्रेन अपनी निर्धारित रफ्तार से आगे बढ़ गई।

जानकारी के मुताबिक मंगलवार की शाम गाड़ी संख्या 26501 वंदे भारत एक्सप्रेस पाटलिपुत्र से बापूधाम मोतिहारी होते हुए अपने गंतव्य की ओर जा रही थी। शाम करीब 6:15 बजे ट्रेन जैसे ही सुगौली स्टेशन से आगे बढ़ी, पहले से घात लगाए अज्ञात शरारती तत्वों ने ट्रेन को निशाना बनाते हुए पत्थर फेंक दिए। वार इतना तेज था कि कोच का शीशा टूट गया और यात्रियों में कुछ देर के लिए खौफ फैल गया।

घटना की सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल हरकत में आ गया। घटनास्थल के आसपास छानबीन शुरू कर दी गई है। संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जा रही है और पत्थरबाजी करने वालों की पहचान के लिए आसपास के इलाकों में जांच का दायरा बढ़ाया गया है।

हैरानी की बात यह है कि बापूधाम मोतिहारी आरपीएफ द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। लोगों से ट्रेनों पर पत्थर नहीं फेंकने और ऐसी हरकत करने वालों की सूचना देने की अपील भी की जाती रही है, लेकिन इसके बावजूद वंदे भारत पर हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।

बार-बार हो रही ऐसी वारदातों ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेन पर हमला केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं, बल्कि सैकड़ों यात्रियों की जान को खतरे में डालने वाली संगीन हरकत भी है। आरपीएफ ने भरोसा दिलाया है कि हमलावरों की जल्द पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि दोबारा कोई ऐसी जुर्रत न कर सके।