Bihar Police:500 रुपये के आम पर बवाल! बाकी पैसे मांगना पड़ा भारी, दरोगाओं पर फल विक्रेता और नाबालिग बेटे की पिटाई का आरोप, VIDEO वायरल
Bihar Police:पूर्वी चंपारण के मोतिहारी से पुलिस की कार्यशैली को लेकर एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है।...
Bihar Police:पूर्वी चंपारण के मोतिहारी से पुलिस की कार्यशैली को लेकर एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक कथित वीडियो ने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि आम की खरीदारी को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद दो पुलिस पदाधिकारियों ने फल विक्रेता और उसके नाबालिग बेटे के साथ मारपीट की।
सोशल मीडिया पर वायरल दावों के अनुसार एक दरोगा ने फल दुकानदार से लगभग 500 रुपये का जर्दा आम खरीदा। आरोप है कि भुगतान के तौर पर केवल 300 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए। जब दुकानदार के बेटे ने शेष राशि की मांग की तो कथित तौर पर विवाद शुरू हो गया। स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि इसके बाद पहले गाली-गलौज हुई और फिर मामला और अधिक तूल पकड़ गया।
वायरल दावों के मुताबिक शाम के समय संबंधित पुलिसकर्मी दोबारा दुकान पर पहुंचे और कथित रूप से दुकानदार के साथ अभद्र व्यवहार किया। आरोप यह भी है कि रात में कुछ अन्य पुलिसकर्मियों के साथ पहुंचकर फल विक्रेता और उसके नाबालिग बेटे की पिटाई की गई। इस पूरे घटनाक्रम से जुड़ा बताया जा रहा सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है।
वायरल वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी कथित तौर पर दो लोगों को पकड़कर ले जाते और उनके साथ हाथापाई करते दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि यह मामला हरसिद्धि थाना क्षेत्र से जुड़ा है और वीडियो में दिखाई देने वाले पुलिस पदाधिकारियों की पहचान भी की जा रही है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोग मांग कर रहे हैं कि आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला वर्दी के दुरुपयोग और अधिकारों के कथित दमन का गंभीर उदाहरण माना जाएगा।
फिलहाल पुलिस प्रशासन की ओर से इस वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में जांच पूरी होने तक वीडियो और उससे जुड़े दावों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
रिपोर्ट- हिमांशु कुमार