Bihar Police: वर्दी की आड़ में फोन पर गंदी बात करना दारोगा को पड़ा महंगा, महिला की शिकायत पर बड़े साहब ने किया सस्पेंड
Bihar Police: जिस पुलिस अधिकारी की जिम्मेदारी शिकायतकर्ता को इंसाफ की राह दिखाना थी, उसी पर महिला से फोन पर पर अमर्यादित बातचीत करने और उसे मानसिक रूप से परेशान करने के आरोप लगे हैं।
Bihar Police: मुजफ्फरपुर में कानून की हिफाजत करने वाली खाकी वर्दी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिस पुलिस अधिकारी की जिम्मेदारी शिकायतकर्ता को इंसाफ की राह दिखाना थी, उसी पर महिला से फोन पर पर अमर्यादित बातचीत करने और उसे मानसिक रूप से परेशान करने के आरोप लगे हैं। मामला सामने आने के बाद वरीय पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा ने सख्त रुख अपनाते हुए अहियापुर थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर सह अनुसंधानकर्ता ललन कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
यह मामला अहियापुर थाना में दर्ज कांड संख्या 1416/26 से जुड़ा है। शिकायतकर्ता महिला का आरोप है कि केस की तफ्तीश करने वाले दारोगा फोन पर उससे अनुचित और अशोभनीय बातें करते थे। महिला के मुताबिक, विरोध करने पर उसे मानसिक रूप से परेशान भी किया जाता था। यानी जिस मामले में उसे जांच और इंसाफ की उम्मीद थी, उसी की जांच से जुड़े अधिकारी के व्यवहार को लेकर उसे वरिष्ठ अफसरों के दरवाजे तक पहुंचना पड़ा।
शिकायत पहुंची बड़े अफसरों तक, फिर शुरू हुई जांच
महिला ने अपनी शिकायत अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO), नगर-02 के समक्ष रखी। इसके बाद मामला वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचा और आरोपों की जांच कराई गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जांच टीम ने शिकायतकर्ता की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों का सत्यापन किया। जांच रिपोर्ट में दारोगा के कथित आचरण और पद के दुरुपयोग से जुड़े आरोपों की पुष्टि होने की बात कही गई है।
रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी ने निलंबन का आदेश जारी किया। निलंबन अवधि के दौरान ललन कुमार को नियमानुसार जीवनयापन भत्ता दिया जाएगा। हालांकि, विभागीय कार्रवाई के आगे के चरण और अंतिम निष्कर्ष के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
खाकी की हनक या जिम्मेदारी?
पुलिस की वर्दी सिर्फ रुतबे का प्रतीक नहीं, बल्कि भरोसे, जवाबदेही और कानून के प्रति जवाबदेही का भी निशान है। शिकायतकर्ता के साथ मर्यादित व्यवहार करना किसी अधिकारी की मेहरबानी नहीं, उसकी ड्यूटी है। अगर जांच करने वाला ही अपने आचरण को लेकर सवालों में घिर जाए, तो आम आदमी आखिर फरियाद लेकर किसके पास जाए? वर्दी पहन लेने भर से हर बातचीत सरकारी कामकाज नहीं बन जाती और पद मिल जाने से किसी को मनमानी का लाइसेंस नहीं मिलता। फोन पर हुई कथित बातचीत के आरोपों ने इसी बुनियादी सवाल को फिर सामने ला दिया है।
निलंबन
एसएसपी की कार्रवाई से विभाग ने फिलहाल यह संदेश दिया है कि शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। फिलहाल निगाहें इस बात पर हैं कि जांच आगे क्या रुख लेती है और क्या पुलिस महकमा जवाबदेही के इस सवाल पर ठोस कार्रवाई तक पहुंचता है।पुलिस महकमा जवाबदेही के इस सवाल पर ठोस कार्रवाई तक पहुंचता है।
रिपोर्ट-मणिभूषण शर्मा