रिश्वत के चार हजार पड़े भारी, पूर्व CO को 4 साल की सजा, 12 साल पुराने मामले में निगरानी कोर्ट का फैसला

Bihar Crime: रिश्वतखोरी के 12 साल पुराने मामले में नवादा के रोह अंचल के तत्कालीन अंचलाधिकारी भोला पासवान को विशेष निगरानी अदालत ने बड़ा झटका दिया है। ...

रिश्वत के चार हजार पड़े भारी- फोटो : reporter

Bihar Crime:  रिश्वतखोरी के 12 साल पुराने मामले में नवादा के रोह अंचल के तत्कालीन अंचलाधिकारी  भोला पासवान को विशेष निगरानी अदालत ने बड़ा झटका दिया है। अदालत ने रिश्वत लेने के दोषी पाए जाने पर उन्हें चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने उन पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

यह मामला वर्ष 2014 का है, जब तत्कालीन सीओ भोला पासवान को चार हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था। निगरानी अदालत का यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मामले के अनुसार, रोह थाना क्षेत्र के समरेरा गांव निवासी राकेश कुमार ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि भूमि विवाद से जुड़े एक काम के लिए तत्कालीन सीओ भोला पासवान द्वारा दरवाजा, खिड़की और बांस लगाने की अनुमति देने के बदले चार हजार रुपये रिश्वत की मांग की जा रही थी।

शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने पूरे मामले का सत्यापन कराया। आरोप सही पाए जाने के बाद 15 अक्टूबर 2014 को निगरानी टीम ने जाल बिछाया। इसी दौरान तत्कालीन सीओ भोला पासवान को चार हजार रुपये रिश्वत लेते हुए मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।गिरफ्तारी के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने मामले की जांच शुरू की। जांच पूरी होने के बाद तत्कालीन अनुसंधानकर्ता ने विशेष निगरानी अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने 11 गवाहों की गवाही कराई और रिश्वतखोरी के आरोपों को साबित करने का प्रयास किया।

बिहार सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक ने मामले की प्रभावी पैरवी की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने भोला पासवान को दोषी करार देते हुए चार साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।न्यायालय के इस फैसले के बाद भ्रष्टाचार के मामलों में सरकारी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश गया है। 12 साल पुराने इस मामले में आए निर्णय ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि रिश्वतखोरी के मामलों में कानूनी प्रक्रिया भले लंबी हो, लेकिन दोष साबित होने पर कार्रवाई से बचना मुश्किल है।

रिपोर्ट- अमन कुमार