Patna Shambhu Girls Hostel: NEET छात्रा कांड में कोर्ट की CBI और SIT को कड़ी फटकार ,निलंबित थानाप्रभारी रौशनी और एसआईटी के बयान अलग-अलग, स्टाफ बोली-बेहोश थी, शरीर पर थे खरोंच
Patna Shambhu Girls Hostel: पटना की फिज़ा में गूंज रहे NEET छात्रा कांड ने अदालत के गलियारों में तूफान खड़ा कर दिया है।
Patna Shambhu Girls Hostel: पटना की फिज़ा में गूंज रहे NEET छात्रा कांड ने अदालत के गलियारों में तूफान खड़ा कर दिया है। अदालत के तेवर इतने सख्त थे कि जांच एजेंसियों को भी कटघरे में खड़ा कर दिया गया। कोर्ट ने CBI से दो-टूक सवाल किया कि जब मामला नाबालिग से जुड़ा है तो पॉक्सो एक्ट क्यों नहीं लगाया गया? 12 फरवरी को CBI ने 307 (अटेम्प्ट टू मर्डर) का केस दर्ज किया, लेकिन अदालत ने पूछा क्या आपके पास पुख्ता सबूत हैं? क्या मनीष रंजन की हिरासत अब भी जरूरी है?
इससे पहले 17 जनवरी तक केस की जांच चित्रगुप्त नगर थाने की तत्कालीन थानेदार रौशनी कुमारी कर रही थीं, बाद में SIT ने कमान संभाली। कोर्ट ने रौशनी से पूछ लिया आपने क्या-क्या जब्त किया? छात्रा का मोबाइल और हॉस्टल का DVR अपने पास क्यों रखा? 24 घंटे में कोर्ट में पेश क्यों नहीं किया? FSL जांच क्यों नहीं कराई?
निलंबित थानाधिकारी रौशनी ने कहा कि 17 जनवरी को सभी सबूत SIT को सौंप दिए थे, जबकि SIT का दावा है कि उन्हें 24 जनवरी को सामग्री मिली। दोनों बयानों में विरोधाभास ने अदालत की भौंहें तान दीं। पीड़ित पक्ष ने साफ आरोप लगाया कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ हुई है।
गिरफ्तार बिल्डिंग मालिक मनीष रंजन की जमानत याचिका पर करीब ढाई घंटे तक चली गरमागरम बहस के बाद अदालत ने राहत देने से इनकार कर दिया। अब इस अर्जी पर 2 मार्च को फिर सुनवाई होगी।
इधर CBI की टीम प्रभात अस्पताल पहुंची और महिला स्टाफ से पांच घंटे तक पूछताछ की। स्टाफ ने बताया कि छात्रा बेहोशी की हालत में लाई गई थी और शरीर पर खरोंच के निशान थे। अस्पताल में दुष्कर्म की चर्चा थी, जबकि अस्पताल रिकॉर्ड में मौत की वजह नशीली दवा का ओवरडोज लिखी गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म का जिक्र सामने आया है।
SIT की अगुवाई कर रहीं सचिवालय SDPO-1 डॉ. अन्नू कुमारी से भी कोर्ट ने पूछा मनीष रंजन की लोकेशन क्या थी? CDR से क्या खुलासा हुआ? जवाब मिला कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड से लोकेशन का मिलान किया गया है।
अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए पुलिस और CBI को पूरी पूछताछ की चेन पेश करने का निर्देश दिया। फिलहाल, मनीष रंजन सलाखों के पीछे हैं और अदालत की अगली तारीख पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह मामला अब सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता की भी कसौटी बन गया है।