Bihar Crime: 72 करोड़ का सफेद जहर पटना जंक्शन पर जब्त, अफ्रीकी कैरियर गिरफ्तार, फिश स्केल कोकीन के इंटरनेशनल सिंडिकेट का खुलासा, इनसाइड स्टोरी
Bihar Crime: राजधानी पटना में अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है।...
Bihar Crime: राजधानी पटना में अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। दिल्ली-एनसीआर की हाई-प्रोफाइल रेव पार्टियों, नाइट क्लबों और नशे के काले कारोबार तक पहुंचने वाली करोड़ों रुपये की कोकीन की खेप को पटना जंक्शन पर दबोच लिया गया। इस कार्रवाई ने न सिर्फ ड्रग माफिया की नई तस्करी तकनीक का खुलासा किया है, बल्कि बिहार को ट्रांजिट रूट के तौर पर इस्तेमाल किए जाने के खतरनाक खेल को भी उजागर कर दिया है। मामला 5 मई की रात का है, जब डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस की टीम ने अगरतल्ला से आनंद विहार जाने वाली तेजस राजधानी एक्सप्रेस में छापेमारी की। ट्रेन के थर्ड एसी कोच बी-8 से केन्या की जिपोरा क्वाम्बोका अताम्बो और तंजानिया की सलमा वजीरी एली को हिरासत में लिया गया।
तलाशी के दौरान ट्रॉली बैग से 110 कोकीन कैप्सूल और विशेष रूप से बनाए गए गुप्त खानों से चार बड़े पैकेट बरामद किए गए। कुल बरामद कोकीन का वजन 6 किलो 75.50 ग्राम बताया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 72 करोड़ रुपये आंकी गई है।सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बिहार में पहली बार कोकीन को पाउडर के बजाय कैप्सूल के रूप में छिपाकर तस्करी करने का मामला सामने आया । प्रत्येक कैप्सूल में लगभग 20 ग्राम हाई-प्योरिटी कोकीन भरी गई थी। ड्रग जगत में इसे कथित तौर पर फिश स्केल कोकीन कहा जाता है, जो अत्यधिक शुद्ध और महंगी श्रेणी की मानी जाती है।
जांच में खुलासा हुआ है कि यह पूरा नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट के तौर पर काम करता है। तस्कर हर ट्रांजिट प्वाइंट पर कैरियर बदल देते हैं ताकि मुख्य सरगना तक जांच एजेंसियां न पहुंच सकें। डीआरआई के मुताबिक दोनों महिलाएं 4 मई को गुवाहाटी पहुंची थीं, जहां उन्हें यह बैग सौंपा गया था। दिल्ली तक खेप पहुंचाने के लिए उन्हें 25-25 हजार रुपये देने की बात सामने आई है।गिरफ्तारी के बाद दोनों अफ्रीकी लड़कियों (आरोपियों) के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें बेउर जेल भेज दिया गया। अब जांच एजेंसी मोबाइल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स, यात्रा इतिहास और संपर्क सूत्रों को खंगाल रही है ताकि गुवाहाटी से दिल्ली तक फैले पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया जा सके।
हालांकि जांच में एक बड़ी चुनौती भाषा भी बनी हुई है। अधिकारियों के अनुसार दोनों फ्रीकी महिलाएं न हिंदी बोलती हैं और न अंग्रेजी, जिससे पूछताछ में दिक्कत आ रही है। उनके लिए दुभाषिए की तलाश की जा रही है ताकि नेटवर्क के मास्टरमाइंड और अंतिम रिसीवर तक पहुंचा जा सके। विदेश मंत्रालय अफ्रिका से संपर्क करने में लगा है। यह बरामदगी इस बात का संकेत है कि बिहार अब केवल उपभोक्ता बाजार नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी के ट्रांजिट कॉरिडोर के रूप में भी इस्तेमाल किया जा रहा है। जांच एजेंसियों की नजर अब इस पूरे सिंडिकेट के उन चेहरों पर है, जो पर्दे के पीछे रहकर करोड़ों के नशे के कारोबार को संचालित कर रहे हैं।