भवन निर्माण विभाग के इंजीनियर पवन से ईओयू लेगी काली कमाई का हिसाब, 13 प्लॉट, करोड़ों की संपत्ति और सोने का खजाना कहां से आया, खुलेगा दौलत का पूरा राज
Bihjar Crime: भवन निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता) पवन कुमार अब आर्थिक अपराध इकाई के शिकंजे में पूरी तरह फंस चुके हैं।...
Bihar Crime: भवन निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता सह निदेशक (निरूपण इकाई) पवन कुमार अब आर्थिक अपराध इकाई के शिकंजे में पूरी तरह फंस चुके हैं। आय से 103.94 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में 7 जुलाई को उन्हें पूछताछ के लिए तलब किया गया है। ईओयू ने इस हाई-प्रोफाइल केस की तह तक पहुंचने के लिए करीब 50 सवालों की फेहरिस्त तैयार की है। दो अलग-अलग टीमें इंजीनियर से आमने-सामने बैठाकर जिरह करेंगी और उनकी कथित काली कमाई का पूरा हिसाब-किताब खंगालेंगी।
ईओयू की छापेमारी में पवन कुमार की दौलत का ऐसा खजाना सामने आया जिसने जांच एजेंसी को भी हैरान कर दिया। जांच में 13 भूखंड, प्लॉट और मकान, करीब 39 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवरात तथा पीपीएफ में लगभग 90 लाख रुपये के निवेश के साक्ष्य मिले हैं। एजेंसी का आरोप है कि इंजीनियर ने करीब 3.89 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति जुटाई, जिसके बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति अर्जित करने का मुकदमा दर्ज किया गया।
सूत्रों के मुताबिक पूछताछ के दौरान सबसे पहले उन बड़ी परियोजनाओं की फाइलें खोली जाएंगी, जिनके टेंडर पवन कुमार ने अधीक्षण अभियंता रहते पास किए। इसके अलावा पत्नी और बच्चों के नाम खरीदी गई जमीन-जायदाद, बैंक खातों, फ्लैटों की खरीद, नकदी, जेवरात, निवेश और संभावित बेनामी संपत्तियों का भी बारीकी से हिसाब मांगा जाएगा। ईओयू यह भी पड़ताल करेगी कि संपत्ति खरीदने में नकद रकम का इस्तेमाल हुआ या बैंकिंग माध्यम अपनाया गया।
बता दें कि 24 जून को पटना, भागलपुर, नोएडा और दिल्ली स्थित छह ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई थी। अब एजेंसी की नजर इस बात पर है कि अकूत दौलत का यह नेटवर्क सिर्फ पवन कुमार तक सीमित है या इसके पीछे किसी बड़े भ्रष्टाचार सिंडिकेट, कमीशनखोरी या टेंडर खेल का भी राज छिपा है। आने वाली पूछताछ इस पूरे मामले के कई नए राज़ बेनकाब कर सकती है।