Patna Crime: वारंट लेकर पहुंची पुलिस पर हमला! पटना में खाकी को घेरकर पीटा, एक पुलिसकर्मी घायल, मामले को छुपाने में जुटा पुलिस विभाग!

Patna Crime: सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि पुलिस पर हुए हमले को दबाने की कोशिश के आरोप सामने आ रहे हैं।...

पटना में खाकी पर हमला, मामला दबाने में जुटी खाकी- फोटो : reporter

Patna Crime: राजधानी पटना में अपराधियों का दुस्साहस किस हद तक बढ़ चुका है, इसकी एक खौफनाक मिसाल गौरीचक थाना क्षेत्र के सतौली गांव में देखने को मिली। अदालत से जारी गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) के तामिला के लिए पहुंची पुलिस टीम पर आरोपी जीतेंद्र राय और उसके समर्थकों ने सुनियोजित तरीके से हमला बोल दिया। कानून का शिकंजा कसने पहुंची खाकी को अपराधियों और उनके हिमायतियों ने खुलेआम चुनौती दी और पुलिस बल को निशाना बनाया।

जानकारी के मुताबिक चार वाहनों में सवार पुलिस फोर्स आरोपी जीतेंद्र राय को गिरफ्तार करने उसके ठिकाने पर पहुंची थी। लेकिन पुलिस की मौजूदगी का कोई खौफ अपराधी गिरोह पर दिखाई नहीं पड़ा। देखते ही देखते जीतेंद्र राय के दो दर्जन से अधिक समर्थकों ने पुलिस टीम को चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद हमला शुरू कर दिया गया। अचानक हुए इस हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और एक पुलिसकर्मी घायल हो गया।

तलाशी के दौरान पुलिस ने जीतेंद्र राय के घर से प्रतिबंधित आठ जिंदा गोलियां भी बरामद की हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार जीतेंद्र राय का आपराधिक इतिहास रहा है और वह पहले भी आर्म्स एक्ट के मामले में जेल की हवा खा चुका है। इसके बावजूद उसके हौसले इतने बुलंद हैं कि उसने कानून के रखवालों पर ही हमला करने का दुस्साहस कर डाला।

घायल पुलिसकर्मी को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया, जबकि पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए जीतेंद्र राय को गिरफ्तार कर थाने पहुंचा दिया। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि पुलिस पर हुए हमले को दबाने की कोशिश के आरोप सामने आ रहे हैं। कथित तौर पर अब तक आरोपी और उसके समर्थकों पर सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, पुलिसकर्मियों से मारपीट करने और पुलिस टीम पर हमले जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज नहीं किया गया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर अपराधियों का मनोबल इतना ऊंचा कैसे हो गया कि वे खाकी पर हाथ उठाने लगे? क्या पुलिस की हनक और इकबाल कमजोर पड़ गया है? यदि पुलिस पर हमला करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं होती, तो यह कानून व्यवस्था के लिए गंभीर खतरे का संकेत है। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि यदि वाकई पुलिस पर हुए हमले को पर्दे के पीछे छिपाने की कोशिश हो रही है, तो यह केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि अपराधियों के बढ़ते मनोबल का प्रमाण भी है। अब जरूरत इस बात की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, हमलावरों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो और यह स्पष्ट किया जाए कि आखिर खाकी पर हमले की सच्चाई को छिपाने की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है।

रिपोर्ट- धीरेंद्र कुमार