गांजा तस्करी मामले में दो दोषियों को 10-10 वर्ष की कड़ी सजा, एक-एक लाख का अर्थ ढंड
Supaul : मादक पदार्थों की अवैध तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे न्यायिक अभियान के तहत सुपौल की एक विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) सह विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस) राकेश कुमार (तृतीय) की अदालत ने गांजा तस्करी के एक मामले में दो आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोनों ही दोषियों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास (जेल) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायपीठ ने दोनों पर एक-एक लाख रुपये का आर्थिक अर्थदंड (जुर्माना) भी लगाया है, जिसे अदा न करने पर उन्हें अतिरिक्त जेल की सजा काटनी होगी।
कुनौली थाना कांड संख्या 111/2022 में पूरी हुई अंतिम सुनवाई
यह पूरा फैसला कुनौली थाना कांड संख्या-111/2022 तथा एनडीपीएस कांड संख्या-57/2022 से जुड़ा हुआ है। इस बहुचर्चित मामले में बीते 27 मई 2026 को विद्वान न्यायाधीश की अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें और अंतिम सुनवाई पूरी हुई थी। अदालत ने पत्रावलियों पर उपलब्ध साक्ष्यों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शनिवार को अदालत ने इस मामले में नामजद दोनों आरोपियों को एनडीपीएस अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत कसूरवार पाते हुए सजा के बिंदु पर मुहर लगा दी।
दोषी अविनाश कुमार और टिंकू कुमार उर्फ टिंकू लाल साह को कोर्ट ने माना कसूरवार
विशेष न्यायालय ने जिन दो तस्करों को इस मामले में सजा सुनाई है, उनकी पहचान अविनाश कुमार और टिंकू कुमार उर्फ टिंकू लाल साह के रूप में की गई है। दोनों के विरुद्ध नार्कोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम के तहत लगाए गए सभी आरोप न्यायिक जांच और बहस के दौरान पूरी तरह सही पाए गए। अदालत ने समाज में बढ़ते नशे के कारोबार पर चिंता व्यक्त करते हुए तस्करों को किसी भी प्रकार की नरमी का हकदार नहीं माना और उन्हें अधिकतम कठोर कारावास भुगतने का आदेश दिया।
साल 2022 में गुप्त सूचना के आधार पर गांजे के साथ हुई थी गिरफ्तारी
मामले की पृष्ठभूमि साल 2022 की है, जब कुनौली थाना पुलिस को क्षेत्र में मादक पदार्थों की एक बड़ी खेप आने की गुप्त सूचना मिली थी। पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घेराबंदी की और दोनों आरोपियों को भारी मात्रा में गांजे के साथ रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी और अनिवार्य कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था। ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूत कड़ियों को जोड़ते हुए आरोपियों के खिलाफ गुनाह सिद्ध किया।
विशेष लोक अभियोजक श्याम सुंदर कुमार ने प्रभावी ढंग से रखा सरकार का पक्ष
अदालत के भीतर सरकार और अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक (स्पेशल पीपी) श्याम सुंदर कुमार ने बेहद प्रभावी ढंग से अपना पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट के समक्ष पुलिस द्वारा तैयार की गई जब्ती सूची, फॉरेंसिक जांच प्रतिवेदन तथा चश्मदीद गवाहों के बयानों को पेश कर आरोपियों के अपराध को अकाट्य रूप से प्रमाणित किया। दूसरी तरफ, बचाव पक्ष के अधिवक्ता संजय कुमार सिंह एवं ललन कुमार ने अपने मुवक्किलों के पक्ष में दलीलें दीं, लेकिन अदालत ने अभियोजन के पुख्ता साक्ष्यों को सही मानते हुए दोनों तस्करों को जेल भेज दिया।
विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट