Bihar Crime: सच लिखने की सजा? पत्रकार के घर आधी रात को पुलिस ने मारा छापा...घोटाले का पर्दाफाश किया तो प्रशासन ने कसा शिकंजा, खबर छापी तो आधी रात घर ब्रेथ एनालाइजर लेकर पहुंची खाकी.... डीजीपी साहब देखिए ये है बिहार की पीपुल्स फ्रेडली पुलिस
Bihar Crime: वैशाली जिला प्रशासन में कथित रसोइया बहाली घोटाले से जुड़ी खबरें प्रकाशित करने के बाद पत्रकार को निशाने पर लिया गया और देर रात उनके घर पर ऐसी कार्रवाई की गई, मानो कोई बड़ा मुजरिम पकड़ने के लिए छापा मारा गया हो।
Bihar Crime: हाजीपुर में एक पत्रकार के गंभीर आरोपों ने सत्ता, प्रशासन और प्रेस की आजादी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। मामला सिर्फ एक घर पर हुई कार्रवाई का नहीं, बल्कि उन सवालों का है जो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की सुरक्षा और स्वतंत्रता से जुड़े हैं। पत्रकार मनीष कुमार सिंह का आरोप है कि जिला प्रशासन में कथित रसोइया बहाली घोटाले से जुड़ी खबरें प्रकाशित करने के बाद उन्हें निशाने पर लिया गया और देर रात उनके घर पर ऐसी कार्रवाई की गई, मानो कोई बड़ा मुजरिम पकड़ने के लिए छापा मारा गया हो।
आरोपों के मुताबिक, रात के सन्नाटे में पुलिस और प्रशासनिक अमला उनके आवास पर पहुंचा। घर में सो रहे परिजनों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मनीष का कहना है कि उनसे पूछताछ की गई, जांच-पड़ताल की गई और हर पहलू को खंगाला गया। पूरा घटनाक्रम ऐसा था जैसे किसी संगीन वारदात के आरोपी के खिलाफ कार्रवाई हो रही हो।
इस पूरे मामले का सबसे चर्चित पहलू वह वीडियो है, जिसमें पत्रकार का ब्रेथ एनालाइज़र टेस्ट किया जाता दिखाई दे रहा है। मनीष कुमार सिंह का दावा है कि उन्होंने कभी शराब का सेवन नहीं किया और जांच में भी अल्कोहल की मात्रा शून्य निकली। ऐसे में उनका सवाल है कि जब न कोई नशा मिला, न कोई आपत्तिजनक वस्तु बरामद हुई, तो फिर इतनी बड़ी कार्रवाई की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?
पत्रकार का आरोप है कि कथित रसोइया बहाली घोटाले को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित होने से कुछ अधिकारी नाराज थे। उनका दावा है कि खबरों के जरिए भ्रष्टाचार की परतें खुल रही थीं और इसी वजह से उन्हें दबाव में लेने या बदनाम करने की कोशिश की गई। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का विस्तृत पक्ष भी सार्वजनिक रूप से सामने आना बाकी है।
लेकिन इस घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि किसी पत्रकार को उसके द्वारा प्रकाशित खबरों के कारण जांच, दबाव या कार्रवाई का सामना करना पड़ता है, तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं रह जाता। यह उस माहौल का संकेत बन जाता है, जिसमें खोजी पत्रकारिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा पर सवाल खड़े होते हैं।
लोकतंत्र में पत्रकार की भूमिका सत्ता और प्रशासन पर निगरानी रखने वाली मानी जाती है। ऐसे में जब कोई पत्रकार यह आरोप लगाए कि घोटाले से जुड़ी रिपोर्टिंग के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई की गई, तो मामला और संवेदनशील हो जाता है। दूसरी तरफ, प्रशासन को भी कानून के दायरे में कार्रवाई करने का अधिकार है। इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले दोनों पक्षों के तथ्यों का सामने आना जरूरी है।
फिलहाल हाजीपुर का यह मामला चर्चा के केंद्र में है। एक तरफ पत्रकार उत्पीड़न के आरोप हैं, तो दूसरी तरफ प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सवाल। लेकिन सबसे बड़ा सवाल वही है अगर सच लिखने वालों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया जाए, तो फिर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का पर्दाफाश कौन करेगा? लोकतंत्र में यही सवाल सबसे अहम और सबसे बेचैन करने वाला है।
रिपोर्ट- रंजन कुमार