SC On Student Protest: कौन से प्रदर्शनकारी होंगे रिहा और किन पर चलेगा केस? जानें सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने छात्र आंदोलन पर बड़ा फैसला सुनाते हुए निर्दोष व नाबालिग छात्रों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है। वहीं, आपराधिक इतिहास वाले 989 प्रदर्शनकारियों पर केस वापस नहीं होंगे। जानिए SC की मुख्य बातें।
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए निर्दोष और नाबालिग छात्रों को तत्काल राहत दी है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि दिल्ली के जंतर-मंतर या देश के किसी भी राज्य में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे बेकसूर छात्रों के खिलाफ पुलिस फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगी। कोर्ट ने ऐसे छात्रों को तुरंत रिहा करने का आदेश भी जारी किया है।
आपराधिक पृष्ठभूमि वालों के खिलाफ केस वापस नहीं होंगे
शीर्ष अदालत ने यह साफ कर दिया है कि राहत का यह आदेश केवल निर्दोष छात्रों पर लागू होगा। आंदोलन की आड़ में हिंसा फैलाने वाले या पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रखने वाले तत्वों को किसी भी तरह की छूट नहीं दी जाएगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज से पहचाने गए 2,873 प्रदर्शनकारियों में से 989 लोगों का आपराधिक इतिहास पाया गया है, जिन पर हत्या, लूट, डकैती, यौन उत्पीड़न और अपहरण जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं। इनके खिलाफ मामले वापस नहीं लिए जाएंगे।
लोकतंत्र में विरोध का अधिकार और पुलिस ज्यादतियों की जांच
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में संवैधानिक दायरे में रहकर अपनी मांगें रखना और शांतिपूर्ण आंदोलन करना छात्रों का मौलिक अधिकार है। इसके साथ ही, कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन, लाठीचार्ज और इलेक्ट्रिक बैटन के इस्तेमाल पर चिंता जताई। पीठ ने निर्देश दिया कि पुलिस की ओर से की गई किसी भी प्रकार की ज्यादती और हिंसा की घटनाओं की निष्पक्ष तथा स्वतंत्र जांच की जानी बेहद जरूरी है।
सबूतों को सुरक्षित रखने का कड़ा निर्देश
निष्पक्ष जांच प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और राज्य सरकारों को सभी डिजिटल व भौतिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। अदालत ने निर्देश दिया कि घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन वीडियो, बॉडी-वॉर्न कैमरा रिकॉर्डिंग, वायरलेस संदेश, पीसीआर कॉल रिकॉर्ड और प्रदर्शनकारियों के डिजिटल डेटा को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए ताकि जांच में इनका सही इस्तेमाल हो सके।
केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब, 3 अगस्त को अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और हिंसा प्रभावित अन्य राज्यों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया है। लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई से जुड़ी सभी याचिकाओं को शीर्ष अदालत ने एक साथ संबद्ध (tag) कर दिया है। अदालत अब इन सभी मामलों पर विस्तृत और एकीकृत सुनवाई 3 अगस्त को करेगी।