मंत्री जी गए थे चार धाम, लौटते हीं दिल्ली में कर दिए कांड, सिंह साहब ने 5 लाख देकर मामला कराया सेट.....

खबरी व्याकुल था,आज फिर बोला कि बर्दाश्त नहीं हो रहा है पत्रकार जी। भला बिहार का क्या होगा ऐसा ऐसा मंत्री रहेगा। तब मैने कहा कि का हुआ। सबसे पहले अकर बकर बकना बंद करो। तब खबरी ने कहा कि खबर हीं ऐसी है भइया। मंत्री के चप्पल कांड से जुड़ी कुछ अपडेट है...... बतायें क्या। मैने कहा कि बताओ। बोला कि मंत्री जी चार धाम की यात्रा पर पूण्य कमाने गए थे। साथ में कुछ और लोग थे। सिंह साहब भी थे। धाम पर एक नामी गिरामी बाबा भी रहते हैं। बाबा का दिल्ली आना जाना लगा रहता है। बाबा मीडिया में भी छाए रहते हैं। मंत्री जी धाम पर उनसे खूब आशीर्वाद लेकर दिल्ली पहुंचे थे।


पूण्य़ कमाकर दिल्ली पहुंचे और होटल में रुक गए। चूकि दिल्ली में भी कुछ काम चलते रहता है तो सोचे होंगे कि कई तरह का काम निपटाकर हीं प्रदेश की राजधानी पहुंचेंगे। मंत्री जी तो मंत्री जी ठहरे....लेकिन वे होटल ताज, होटल अशोका, होटल संग्रीला...आदि होटल में नहीं रुकते हैं। समाजवादी पृष्ठभूमि वाले ठाठ वाट से रहनेवाले नेता जी के शिष्य होने की वजह से होटल का चुनाव भी दिल्ली में थोड़ा हटकर राजधानी के बड़े पॉश इलाके में करते  हैं, ताकि एकांतवास का मजा भी लिया जाए। 


खैर...एक कहावत है कि लूर, लक्षण और बाई तीनों मरले पर जाई। आदत के मुताबिक होटल में रुकने पर उनको कुछ-कुछ होने लगा। ले लोट्टा..इसी चक्कर में वो हो गया जिसकी कल्पना तक उन्होंने नहीं की थी। हालांकि लोग अब बुझने लगे हैं कि मंत्री जी कौन हैं। अब सवाल है कि कई लोग पूछने लगते हैं कि नाम क्यों नहीं बता रहे। अरे भाई कुछ खबरें पहले छायावाद में चला करती है। कुछ दिमाग पर जोर पाठक वर्ग भी लगाएं। नाम गांव तो आ हीं जायेगा सामने।


मंत्री जी कांड तो कर दिए परिणाम भी सामने आ गया। अब तो सवाल था कि अब कुछ और सामने आ जायेगा तो क्या होगा। बताया जाता है एक सिंह साहेब भी बगल वाले कमरे में ठहरे थे। उनको जानकारी मिली तो बेचारे कपार ठोक लिए। फिर मंत्री जी का मामला सेट करवाने की कोशिश में लग गए। बेचारे कामयाब रहे। खबरी कहता है कि उपर नीचे करते करते 5 लाख में मामला सेट हुआ। खबरी बताया कि सामने वाली किसी-किसी तरह मान गई।

लेकिन मंत्री जी को होश आने के बाद तो फटी पड़ी थी। अब उसको लेवल में कैसे करें। बात बाहर न चला जाए। खबरी ने बताया कि बेचारे को जल्दी जल्दी में इष्ट मित्रों ने दूसरे शहर की फ्लाइट का टिकट काट रवाना कर दिया। वहां से फिर मंत्री जी पटना पहुंचे। इस कहते है लेने के देने पड़ना। जारी है.....

खबरी की रिपोर्ट