बंगाल और तमिलनाडु विस चुनाव में वोटिंग का टूटा तमाम रिकॉर्डस, मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा-हर वोटर को मेरा सलाम

Desk : पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के आज पहले चरण का वोटिंग हुआ। वोटर ने इस चुनाव में अपने मत का प्रयोग कर अबतक के सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने इसे लेकर दोनो राज्यों की जनता का आभार जताया है...

Desk : पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के आज पहले चरण का मतदान हुआ. सबसे बड़ी बात यह है कि इस मतदान में मतदाताओं ने वोटिंग को लेकर आज तक के तमाम रिकॉर्ड्स तोड़ दिए हैं. पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत मतदान के तहत शाम 7 बजे तक 91.83 फीसदी मतदान हुआ है जबकि तमिलनाडु में शाम 7 बजे तक कुल मतदान प्रतिशत 84.73 फीसदी मतदान हुआ है. दोनों राज्यों में ये आज तक हुए तमाम चुनाव में हुआ सबसे अधिक मतदान प्रतिशत है. 

हर मतदाता को मेरा सलाम मुख्य चुनाव आयुक्त

इन दोनों राज्यों में रिकॉर्ड मतदान को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि इन दोनों राज्यों के मतदाताओं को मेरा सलाम है. आज़ादी के बाद से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में अब तक का सबसे ज़्यादा मतदान प्रतिशत है. चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के हर मतदाता को सलाम करता है.


'लोगों ने बिना डर के वोट डाला : पश्चिम बंगालके चुनाव आयुक्त 

वहीं पश्चिम बंगालके CEO मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि वोटिंग का पहला चरण आज पूरा हो गया. इसमें 152 विधानसभा सीटें और 45,000 बूथ थे... कुछ जगहों पर अभी भी वोटिंग चल रही है तो कुछ जगहों पर कागजी कार्रवाई हो रही है और EVM को सील किया जा रहा है. इन्हें स्ट्रॉन्ग रूम में भेजा जाएगा.' उन्होंने कहा, 'लोगों ने बिना किसी डर के वोट डाला. मुझे रिपोर्ट मिली है कि वे व्यवस्थाओं से काफी खुश थे और घटनाएं भी कम हुईं. मैं निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनावों के लिए सभी राजनीतिक दलों और सभी संबंधित पक्षों को धन्यवाद देना चाहता हूं.'


शाम 7 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार,  तमिलनाडु में इस बार कुल 84.73 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो वर्ष 2021 के 71.8 प्रतिशत मतदान की तुलना में 12.8 प्रतिशत अधिक है. वहीं, पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 2026 में 91.83 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि 2021 में यह आंकड़ा 84.6 प्रतिशत रहा था. इस तरह पश्चिम बंगाल में पहले चरण में मतदान प्रतिशत 7 फीसदी ज्यादा है.

रिकॉर्ड मतदान को लेकर इस कहा जा रहा है कि बड़ी संख्या में मतदात का फायदा किसी एक दल को ज्यादा हो सकता है. अगर ऐसा हुआ तो किसी एक दल के लिए बड़े अंतर से जीत दर्ज करना सिर्फ एक औपचारिकता भर हो सकती है. चार मई को ये साफ हो जाएगा कि इस बार आखिर जनता ने बदलाव के लिए मतदान किया है या फिर दीदी को एक बार फिर सत्ता तक पहुंचाने के लिए.