Today Panchang: अपरा एकादशी पर बन रहा शुभ योग, जानें किस समय करें पूजा कौन है सबसे सही टाइम

Today Panchang: पढ़ें 13 मई 2026 का पंचांग। जानें अपरा एकादशी, राहुकाल, नक्षत्र, शुभ योग और पूजा उपाय की पूरी जानकारी।

अपरा एकादशी पर बन रहा शुभ योग- फोटो : social media

Today Panchang: धार्मिक और ज्योतिष दृष्टि से बुधवार, 13 मई 2026 का दिन  खास माना जा रहा है। आज सूर्य उत्तरायण और उत्तर गोल में स्थित हैं तथा वसंत ऋतु चल रही है। आज अपरा एकादशी का पावन व्रत भी रखा जा रहा है, जिसे भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। पंचांग के अनुसार आज कई महत्वपूर्ण योग और नक्षत्र बन रहे हैं, जिनका असर दैनिक जीवन और पूजा-पाठ पर देखा जाता है।

आज एकादशी तिथि दोपहर 01 बजकर 29 मिनट तक रहेगी। इसके बाद द्वादशी तिथि शुरू हो जाएगी। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र रात्रि 12 बजकर 17 मिनट तक रहेगा, फिर रेवती नक्षत्र का आरंभ होगा। विष्कुम्भ योग रात्रि 08 बजकर 55 मिनट तक रहेगा, उसके बाद प्रीति योग शुरू होगा। बालव करण दोपहर 01 बजकर 29 मिनट तक रहेगा और फिर कौलव करण लग जाएगा। आज चंद्रमा पूरे दिन और रात मीन राशि में संचार करेगा।

अशुभ मुहूर्त कब है?

अगर अशुभ मुहूर्त की बात करें तो आज राहुकाल दोपहर 12:00 बजे से 01:30 बजे तक रहेगा। इस समय नए और शुभ कार्यों से बचना अच्छा माना जाता है। गुलिक काल सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक रहेगा। वहीं यमगंड सुबह 07:30 बजे से 09:00 बजे तक रहेगा। आज चंद्रदेव उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। यह नक्षत्र मीन राशि के 3 डिग्री 20 मिनट से 16 डिग्री 40 मिनट तक माना जाता है। इस नक्षत्र के स्वामी शनिदेव हैं जबकि राशि स्वामी बृहस्पति देव हैं। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के देवता अहिर्बुध्न्य माने जाते हैं, जिन्हें गहरे जल के नाग देवता कहा जाता है। इस नक्षत्र का प्रतीक शवपेटिका या अर्थी माना जाता है।

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में जन्मे लोग कैसे होते हैं?

ज्योतिष मान्यता के अनुसार उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में जन्मे लोग शांत स्वभाव के होते हैं। ऐसे लोग एकांत पसंद करते हैं और दूसरों की मदद करने में विश्वास रखते हैं। इनमें दया, आध्यात्मिक सोच और प्रकृति के प्रति प्रेम देखने को मिलता है। ये लोग स्वतंत्र विचारों वाले होते हैं और मेहनत से अपने कार्य पूरे करते हैं। आज अपरा एकादशी का व्रत भी रखा जा रहा है। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 12 मई को दोपहर 02 बजकर 52 मिनट पर शुरू हुई थी और 13 मई को दोपहर 01 बजकर 29 मिनट पर समाप्त होगी। व्रत का पारण 14 मई को सुबह 05:31 बजे से 08:14 बजे तक किया जाएगा।

किसे कहा जाता है अपरा एकादशी?

धार्मिक मान्यता है कि ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है। यह व्रत सुख-समृद्धि, सम्मान और मानसिक शांति देने वाला माना जाता है। आज के दिन भगवान विष्णु को पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करना शुभ रहेगा। बुधवार और अपरा एकादशी का विशेष संयोग होने के कारण गौ माता को हरा चारा खिलाना और भगवान कृष्ण की पूजा करना भी लाभकारी माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में सुख-शांति और सकारात्मकता बनी रहती है।