Bihar News:हाजीपुर का रामचौरा मंदिर बना राम पदचिह्न का दिव्य साक्ष्य, रामनवमी पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, आस्था का अद्भुत संगम

Bihar News: त्रेतायुग में ताड़कासुर वध के उपरांत मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम अपने अनुज लक्ष्मण एवं गुरु विश्वामित्र के साथ नारायणी नदी के तट पर अवतरित हुए थे।

रामचौरा मंदिर बना राम पदचिह्न का दिव्य साक्ष्य- फोटो : reporter

Vaishali: हाजीपुर स्थित रामभद्र मोहल्ला इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा और जनआस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है। यहाँ स्थित प्रसिद्ध रामचौरा मंदिर में रामनवमी के अवसर पर श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व समागम देखने को मिल रहा है। प्राचीन मान्यताओं और पौराणिक आख्यानों से अनुप्राणित यह स्थल न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

लोकश्रुति के अनुसार, त्रेतायुग में ताड़कासुर वध के उपरांत मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम अपने अनुज लक्ष्मण एवं गुरु विश्वामित्र के साथ नारायणी नदी के तट पर अवतरित हुए थे। कहा जाता है कि मुंडन संस्कार के पश्चात दोनों भ्राताओं ने पवित्र स्नान कर जनकपुर की दिशा में प्रस्थान किया। इसी पावन स्थल पर भगवान श्रीराम ने अपने चरण-चिह्न अंकित किए, जो आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का जीवंत प्रतीक बने हुए हैं।

स्थानीय परंपराओं के अनुसार, भगवान राम के आगमन के पश्चात ही इस क्षेत्र का नाम रामचौरा अथवा रामभद्र प्रचलित हुआ। जहाँ कभी एक साधारण मिट्टी का टीला हुआ करता था, आज उसी स्थान पर लगभग 151 फीट ऊँचा भव्य मंदिर खड़ा है, जिसकी स्थापत्य शैली में अयोध्या के दिव्य मंदिर की झलक दृष्टिगोचर होती है।

रामनवमी के पावन पर्व पर मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी विद्युत सज्जा से अलंकृत किया गया है। सम्पूर्ण वातावरण में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का संचार हो रहा है। मंदिर प्रांगण में अखंड रामायण पाठ, विशेष पूजा-अर्चना तथा विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें दूर-दराज़ से आए श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।

पुराणों में भी इस स्थल का उल्लेख मिलता है कि जनकपुर में आयोजित सीता स्वयंवर के लिए प्रस्थान करते समय श्रीराम, लक्ष्मण और महर्षि विश्वामित्र ने नाव के माध्यम से गंगा पार कर इसी क्षेत्र में आगमन किया था। उस समय वैशाली के राजा सुमति ने उनका स्वागत-सत्कार किया और यहीं उन्होंने रात्रि विश्राम कर पूजा-अर्चना संपन्न की। आज यह पावन धाम न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि इतिहास, पुरातत्व और लोकविश्वास का अद्वितीय संगम भी प्रस्तुत करता है जहाँ हर कदम पर राम कथा सजीव प्रतीत होती है।

रिपोर्ट- ऋषभ कुमार