बिहार की यूनिवर्सिटियों पर सरकार का बड़ा ऑपरेशन, कॉलेज होंगे सीधे शिक्षा विभाग के अधीन, राजभवन बनाम सरकार की जंग फिर छिड़ने के आसार

Bihar Education Reform: बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव आने की तैयारी है। ...

बिहार की यूनिवर्सिटियों पर सरकार का बड़ा ऑपरेशन, - फोटो : social Media

Bihar Education Reform: बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव आने की तैयारी है। राज्य सरकार आगामी मानसून सत्र में नया उच्च शिक्षा विधेयक लाने जा रही है, जिसके जरिए दशकों पुरानी विश्वविद्यालय व्यवस्था में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। अगर यह कानून मंजूर हो जाता है तो राज्य के सरकारी डिग्री कॉलेज विश्वविद्यालयों से अलग होकर सीधे उच्च शिक्षा विभाग के अधीन आ जाएंगे। इससे कॉलेजों के प्रशासन, शिक्षकों की नियुक्ति, तबादला, पदोन्नति और सेवा संबंधी तमाम फैसलों की बागडोर सीधे सरकार के हाथ में होगी। इस प्रस्ताव ने एक बार फिर उन पुराने विवादों की याद ताजा कर दी है, जब विश्वविद्यालयों के अधिकारों को लेकर सरकार और राजभवन आमने-सामने आ गए थे।

साल 2023 में तत्कालीन शिक्षा विभाग और राजभवन के बीच अधिकार की जंग खुलकर सामने आई थी। मामला उस समय गरमा गया था, जब शिक्षा विभाग ने बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के कुलपति और प्रतिकुलपति के खिलाफ कार्रवाई करते हुए विश्वविद्यालय के बैंक खाते फ्रीज कराने और वेतन रोकने जैसे कदम उठाए थे। राजभवन ने इसे विश्वविद्यालयों की  दखल करार देते हुए खातों को बहाल करने का आदेश दिया था। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच लगातार पत्राचार और बयानबाजी हुई, जिससे शिक्षा जगत में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई थी।

विवाद केवल प्रशासनिक अधिकारों तक सीमित नहीं रहा। नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम लागू करने को लेकर भी सरकार और राजभवन आमने-सामने आ गए थे। शिक्षा विभाग ने इसे टालने की कोशिश की, जबकि राजभवन ने यूजीसी के दिशा-निर्देशों के मुताबिक इसे लागू करने पर जोर दिया। आखिरकार अधिकांश विश्वविद्यालयों में यह व्यवस्था लागू हुई।

अब प्रस्तावित विधेयक के तहत सरकारी डिग्री कॉलेजों को विश्वविद्यालयों से अलग कर सीधे उच्च शिक्षा विभाग के नियंत्रण में लाने की तैयारी है। प्रस्ताव के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति, पदोन्नति, तबादला और सेवा संबंधी सभी फैसले सचिवालय स्तर से होंगे। हर जिले में हायर एजुकेशन ऑफिसर तैनात किए जाएंगे, जो कॉलेजों की निगरानी करेंगे। साथ ही डिग्री कॉलेज के शिक्षक विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर के पद पर स्थानांतरित नहीं हो सकेंगे। असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए NET अनिवार्य होगा, जबकि PhD की अनिवार्यता खत्म करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा शिक्षकों के राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने या किसी राजनीतिक विचारधारा का सार्वजनिक समर्थन करने पर भी रोक लगाने की तैयारी है।

वर्तमान राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने भी संकेत दिए हैं कि आगामी विधानसभा सत्र में उच्च शिक्षा से जुड़ा नया विधेयक पेश किया जा सकता है। फिलहाल राजभवन की ओर से इसका विरोध सामने नहीं आया है, लेकिन यदि विश्वविद्यालयों के अधिकारों में व्यापक कटौती होती है तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा फिर सियासी और कानूनी मुकाबले का केंद्र बन सकता है। अब सबकी निगाहें मानसून सत्र पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था की नई व्यवस्था कैसी होगी।