Bihar Private Schools: फीस वसूली पर प्रशासन ने कसा शिकंजा! 312 प्राइवेट स्कूलों को नोटिस, मनमानी पर मचा हड़कंप
Bihar Private Schools: निजी स्कूलों की मनमानी और अवैध फीस वसूली पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है।...
Bihar Private Schools: निजी स्कूलों की मनमानी और अवैध फीस वसूली पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है।बिहार के मुजफ्फरपुर और तिरहुत प्रमंडल में निजी स्कूलों की मनमानी और अवैध फीस वसूली पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। लंबे समय से अभिभावकों की शिकायतों के बाद हुई जांच ने शिक्षा व्यवस्था के भीतर छिपी वसूली की परतें खोल दी हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
मुजफ्फरपुर में निजी स्कूलों की बढ़ती फीस को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद प्रशासन ने तिरहुत प्रमंडल के सभी जिलों में विस्तृत जांच अभियान चलाया। जांच के दौरान पाया गया कि कई स्कूल बिहार सरकार के निजी स्कूल शुल्क वृद्धि अधिनियम 2019 का खुलेआम उल्लंघन कर रहे थे।
इस अधिनियम के अनुसार, कोई भी निजी स्कूल एक शैक्षणिक वर्ष में केवल 7 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ा सकता है। लेकिन जांच रिपोर्ट में सामने आया कि कई संस्थानों ने इससे कहीं अधिक फीस वसूली कर अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डाल दिया।
प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि नियम तोड़ने वाले सभी 312 निजी स्कूलों को नोटिस भेजा जाए और उनसे अतिरिक्त वसूली गई फीस तुरंत वापस कराई जाए। उन्होंने साफ कहा कि यदि स्कूल आदेश का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
तिरहुत प्रमंडल के कुल 3110 निजी स्कूलों की जांच की गई, जिसमें मुजफ्फरपुर, वैशाली, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी और शिवहर जिले शामिल थे। जांच में 312 स्कूलों को नियम उल्लंघन का दोषी पाया गया।
जिला स्तर पर स्थिति कुछ इस प्रकार रही- वैशाली में 110 स्कूल दोषी पाए गए, पश्चिम चंपारण में 72, पूर्वी चंपारण में 57, शिवहर में 31 और सीतामढ़ी में 27 स्कूलों ने नियमों का उल्लंघन किया। वहीं मुजफ्फरपुर की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही, जहां 832 स्कूलों में से केवल 15 स्कूल ही दोषी पाए गए। वैशाली जिला इस मामले में सबसे अधिक विवादों में रहा, जहां सबसे ज्यादा गड़बड़ियां सामने आईं। वहीं मुजफ्फरपुर प्रशासन ने इसे राहत की स्थिति बताया है, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी है कि भविष्य में किसी भी प्रकार की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस कार्रवाई के बाद निजी स्कूलों के प्रबंधन में बेचैनी फैल गई है। कई स्कूलों को अब न सिर्फ अतिरिक्त फीस लौटानी होगी, बल्कि जवाब भी देना होगा कि उन्होंने नियमों का उल्लंघन क्यों किया। दूसरी ओर, अभिभावकों ने प्रशासन के इस कदम का खुलकर स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से शिक्षा के नाम पर चल रही “फीस की लूट” पर यह कार्रवाई एक बड़ी राहत लेकर आई है। फिलहाल प्रशासन ने साफ कर दिया है कि शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार की मनमानी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी संस्थानों पर आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।