Bihar Teacher News: राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार की दौड़ शुरू, 15 साल का इंतजार खत्म करने का मौका,गुरुजी के सामने फिर सुनहरा अवसर

Bihar Teacher News: राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होते ही शिक्षा जगत में नई उम्मीदों की लहर दौड़ गई है। ...

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार की दौड़ शुरू- फोटो : social Media

Bihar Teacher News: राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होते ही शिक्षा जगत में नई उम्मीदों की लहर दौड़ गई है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, भारत सरकार द्वारा ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं और इच्छुक शिक्षक 10 जुलाई तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। यह पुरस्कार देश के उन शिक्षकों को दिया जाता है जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण योगदान देकर विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है।

गया जिले के लिए इस बार का अवसर इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि पिछले डेढ़ दशक से जिले का कोई भी शिक्षक राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार हासिल नहीं कर सका है। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि जिले में प्रतिभाशाली, नवाचारी और समर्पित शिक्षकों की कोई कमी नहीं है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर अपने कार्यों और उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं कर पाने के कारण कई योग्य शिक्षक अंतिम चयन तक नहीं पहुंच पाते हैं।

गया का राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से गौरवशाली इतिहास रहा है। वर्ष 1973 में स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद को यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला था। इसके बाद 1985 में स्वर्गीय चंद्रिका सिंह, 1997 में डॉ. सचिदानंद प्रेमी तथा वर्ष 2017 में स्वर्गीय प्रबोध कुमार और स्वर्गीय विश्वनाथ विश्वकर्मा को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इन शिक्षकों ने अपने समर्पण, अनुशासन और नवाचार से जिले का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया था।

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित डॉ. सचिदानंद प्रेमी का कहना है कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने वाला कर्मचारी नहीं, बल्कि समाज निर्माण का सबसे मजबूत स्तंभ होता है। उन्होंने कहा कि पहले शिक्षक विद्यार्थियों और अभिभावकों को अपने परिवार का हिस्सा मानते थे, जिससे शिक्षा और समाज के बीच गहरा रिश्ता बनता था। आज भी उसी आत्मीयता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जाए तो शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव संभव है।

उन्होंने वर्तमान शिक्षकों से अपील की कि वे अपने नवाचार, उपलब्धियों और शिक्षण कार्यों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण करें तथा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए आवेदन अवश्य करें। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का भी मानना है कि जिले के कई शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं और यदि वे सक्रिय भागीदारी करें तो गया एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान दर्ज करा सकता है।अब शिक्षा जगत की निगाहें 10 जुलाई की अंतिम तिथि पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस बार बड़ी संख्या में शिक्षक आवेदन करेंगे और गया जिले के गौरवशाली इतिहास में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार का एक नया अध्याय जुड़ सकेगा।