Bihar Teacher Transfer: अब नहीं चलेगी सिफारिश, बिहार सरकार ने शिक्षकों के ट्रांसफर का लिए लागू किया नया फॉर्मूला , जानिए किसे मिलेगी पहली पसंद का जिला

Bihar Teacher Transfer: बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के तबादले की पूरी तस्वीर अब बदलने जा रही है। ...

बिहार में शिक्षकों के ट्रांसफर का नया फार्मूला लागू- फोटो : social Media

Bihar Teacher Transfer:  बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के तबादले की पूरी तस्वीर अब बदलने जा रही है। शिक्षा विभाग ने ट्रांसफर प्रक्रिया को सिफारिश और पैरवी से दूर ले जाकर 100 अंकों की एपीआई आधारित डिजिटल व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। नई नीति के तहत सबसे अधिक अंक हासिल करने वाले शिक्षकों को पहले अपनी पसंद का जिला और स्कूल चुनने का अवसर मिलेगा। यदि दो शिक्षकों के अंक बराबर होंगे, तो अधिक उम्र वाले शिक्षक को प्राथमिकता दी जाएगी।

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि इस नई व्यवस्था का मकसद तबादला प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाना है। अब आवेदन से लेकर दस्तावेजों के सत्यापन और पोस्टिंग तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। शिक्षकों को उनके डिजिटल प्रोफाइल पर ही ट्रांसफर की पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

नई नीति में गंभीर बीमारियों से जूझ रहे शिक्षकों को सबसे अधिक राहत दी गई है। कैंसर, ओपन हार्ट सर्जरी, किडनी प्रत्यारोपण, ब्रेन ट्यूमर और बोन टीबी जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित शिक्षकों को 20 अंक दिए जाएंगे। निर्धारित मानकों के तहत आने वाले दिव्यांग शिक्षकों को 15 अंक, जबकि महिला शिक्षकों और अलग-अलग जिलों में तैनात पति-पत्नी शिक्षकों को 10-10 अंक मिलेंगे।

अनुभव को भी बराबर अहमियत दी गई है। 31 मार्च तक की सेवा अवधि के आधार पर प्रत्येक वर्ष के लिए एक अंक निर्धारित किया गया है। इसके अलावा वर्तमान कार्यस्थल की परिस्थितियों और विभागीय मानकों के आधार पर भी अंक जोड़े जाएंगे। अंतिम मेरिट सूची इन्हीं अंकों के आधार पर तैयार होगी।

पोस्टिंग पूरी तरह रिक्त पदों पर निर्भर करेगी। अधिक अंक पाने वाले शिक्षक पहले अपनी पसंद के स्कूल का चयन कर सकेंगे, जबकि कम अंक वाले शिक्षकों को बची हुई रिक्तियों के अनुसार समायोजित किया जाएगा। इससे शिक्षकों का संतुलित वितरण सुनिश्चित होने की उम्मीद है। शिक्षा विभाग का मानना है कि यह व्यवस्था वर्षों से तबादलों पर लगते रहे भाई-भतीजावाद और सिफारिश के आरोपों पर लगाम लगाएगी। डिजिटल सत्यापन और मेरिट आधारित चयन से प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बनेगी तथा वास्तविक जरूरतमंद शिक्षकों विशेषकर गंभीर बीमारी और दिव्यांगता से जूझ रहे शिक्षकों को प्राथमिकता मिलेगी। विभाग को उम्मीद है कि यह नई व्यवस्था न केवल शिक्षकों का भरोसा बढ़ाएगी, बल्कि बिहार की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को भी अधिक प्रभावी, पारदर्शी और संतुलित बनाएगी।