Bihar Education News: नियमों को ताक पर रखकर बिना मंजूरी 65 करोड़ का भुगतान, खुलासा होते हीं शिक्षा विभाग में मचा है हड़कंप, फाइल प्रक्रिया पर उठे सवाल

Bihar Education News: मदरसा एवं संस्कृत शिक्षकों के एरियर भुगतान में करीब 65 करोड़ रुपये के कथित अनियमित भुगतान को लेकर विभागीय तंत्र में भारी हलचल मच गई है।...

Bihar Education News: मदरसा एवं संस्कृत शिक्षकों के एरियर भुगतान में करीब 65 करोड़ रुपये के कथित अनियमित भुगतान को लेकर विभागीय तंत्र में भारी हलचल मच गई है। बिहार के पूर्णिया जिला शिक्षा विभाग एक बार फिर बड़े वित्तीय विवाद के केंद्र में आ गया है। मामला सामने आने के बाद इसे वित्तीय अनुशासन और नियमावली की अनदेखी का गंभीर उदाहरण माना जा रहा है, वहीं विभाग के भीतर ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

जानकारी के अनुसार, मदरसा और संस्कृत विद्यालयों के 1178 शिक्षकों के पंचम एवं षष्ठम वेतन पुनरीक्षण की अंतर राशि के भुगतान से जुड़ी यह पूरी प्रक्रिया है। इसमें लगभग 700 शिक्षकों का एरियर पहले ही भुगतान किया जा चुका था, जबकि शेष करीब 478 शिक्षकों के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 83 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। इसी क्रम में प्री-ऑडिट और प्रक्रिया के दौरान करीब 64 करोड़ 90 लाख रुपये का भुगतान ट्रेजरी के माध्यम से सीधे लाभुकों के खातों में भेज दिया गया।

मामले में आरोप है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी की स्पष्ट स्वीकृति और आवश्यक टिप्पणी के बिना ही पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। कनीय लिपिक मोनाजिर आलम द्वारा संचिका तैयार की गई, जिसे प्रधान लिपिक शाहनवाज अहमद ने आगे बढ़ाया। इसके बाद फाइल सीधे डीपीओ स्थापना तक पहुंची और भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर दी गई। हालांकि डीपीओ स्थापना शशि चन्दन चौधरी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि भुगतान प्री-ऑडिट और नियमानुसार प्रक्रिया के बाद किया गया है, तथा इसमें किसी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है। वहीं कनीय लिपिक का भी दावा है कि सभी कार्य स्वीकृत प्रक्रिया के तहत ही किए गए।

दूसरी ओर जिला शिक्षा पदाधिकारी रवीन्द्र प्रकाश ने इस पूरे मामले को गंभीर अनियमितता मानते हुए दोनों लिपिकों के खिलाफ आरडीडीई से आरोप पत्र गठित कर कार्रवाई की अनुशंसा की है। उनका कहना है कि बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ाना नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।वहीं आरडीडीई कुन्दन कुमार ने मामले की जानकारी मिलने के बाद डीपीओ स्थापना से शो-कॉज और विस्तृत मंतव्य तलब करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद आगे की कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे प्रकरण ने शिक्षा विभाग के वित्तीय प्रबंधन और फाइल प्रोसेसिंग सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाह इस बात पर टिकी है कि जांच के बाद यह मामला प्रशासनिक लापरवाही साबित होता है या किसी बड़े वित्तीय गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।