Bihar Teacher Fraud: डॉक्टर बहू ने शिक्षिका सास का खोला भेद, सास-बहू की जंग से खुला शैक्षणिक प्रमाणपत्र के फर्जीवाड़े का फाइल, नकली सर्टिफिकेट से सरकारी नौकरी

Bihar Teacher Fraud: सास-बहू के रिश्ते का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पारिवारिक विवाद को सरकारी जांच के कटघरे तक पहुंचा दिया है।

डॉक्टर बहू ने शिक्षिका सास का खोला भेद- फोटो : reporter

Bihar Teacher Fraud:  बिहार के शेखपुरा जिले से सास-बहू के रिश्ते का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पारिवारिक विवाद को सरकारी जांच के कटघरे तक पहुंचा दिया है। यहां एक डॉक्टर बहू ने अपनी ही शिक्षिका सास पर फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। शिकायत के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल आरोपों की जांच जारी है ।

मामला शेखोपुरसराय प्रखंड के किसनपुर गांव का है। शिकायतकर्ता डॉ. रिंकू कुमारी सिंह ने जिला शिक्षा पदाधिकारी विनोद कुमार शर्मा को साक्ष्यों के साथ विस्तृत शिकायत देकर आरोप लगाया कि उनकी सास उर्मिला देवी, जो सरकारी विद्यालय में शिक्षिका हैं, ने कथित तौर पर उम्र और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों में हेरफेर कर नौकरी हासिल की तथा वर्षों तक सरकारी सेवा का लाभ उठाया

डॉ. रिंकू का आरोप है कि उर्मिला देवी के मैट्रिक, इंटरमीडिएट और शिक्षक प्रशिक्षण प्रमाणपत्र संदिग्ध हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि इंटरमीडिएट (1984–1986) और शिक्षक प्रशिक्षण (1985–1987) की अवधि एक-दूसरे से ओवरलैप करती है, जिससे प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े होते हैं। उनका कहना है कि दोनों पाठ्यक्रमों का एक ही समय में नियमित रूप से पूरा होना संदेह पैदा करता है।

शिकायत में सबसे बड़ा दावा जन्मतिथि को लेकर किया गया है। डॉ. रिंकू के अनुसार, उनके ससुर कृष्णनंदन प्रसाद, जो बोकारो स्टील प्लांट से वर्ष 2010 में सेवानिवृत्त हुए, की सर्विस बुक में उनकी पत्नी उर्मिला देवी की जन्मतिथि 1955 दर्ज है। जबकि शिक्षिका की नौकरी के लिए कथित तौर पर 1968 जन्मतिथि वाला प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि उनके बेटे नील पंकज की जन्मतिथि 1975 है। यदि 1968 वाली जन्मतिथि सही मानी जाए, तो उर्मिला देवी सात वर्ष की उम्र में मां बन गईं जो स्पष्ट रूप से असंभव प्रतीत होता है। इसी आधार पर दस्तावेजों में कथित फर्जीवाड़े का आरोप लगाया गया है।

डॉ. रिंकू का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक इन दस्तावेजों और तथ्यों को एकत्र किया। उनका आरोप है कि घरेलू विवाद के दौरान सास ने उन्हें पति से अलग कर दिया, जिसके बाद मामला तलाक तक पहुंच गया। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि यह शिकायत केवल निजी विवाद नहीं, बल्कि सार्वजनिक हित और सरकारी व्यवस्था में कथित धोखाधड़ी को उजागर करने के उद्देश्य से की गई है।शिकायत के बाद शेखपुरा जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय ने उर्मिला देवी को नोटिस जारी कर आरोपों पर स्पष्टीकरण मांगा है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला और जांच में आरोप सही पाए गए, तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला अब शिक्षा विभाग की जांच के अधीन है। जांच पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल, यह प्रकरण शिक्षा व्यवस्था में प्रमाणपत्रों की जांच और नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

उमेश की रिपोर्ट