जुबान फिसली और पद गया! जगदगुरु पर टिप्पणी के बाद किन्नर अखाड़ा ने ममता कुलकर्णी को किया निष्कासित, छीनी महामंडलेश्वर की उपाधि
किन्नर अखाड़ा ने जगदगुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ विवादित टिप्पणी करने पर महामंडलेश्वर श्रीयामायी ममतानंद गिरि (ममता कुलकर्णी) को निष्कासित कर दिया है। अखाड़े ने इस बयान को अनुशासनहीनता और मर्यादा का उल्लंघन मानते हुए सख्त कार्रवाई की है।
N4N Desk - जगदगुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर टिप्पणी करने के मामले में किन्नर अखाड़ा ने कड़ा रुख अपनाते हुए श्रीयामायी ममतानंद गिरि (पूर्व अभिनेत्री ममता कुलकर्णी) को अखाड़े से निष्कासित कर दिया है. ममतानंद गिरि ने कुछ दिनों पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को 'अहंकारी' बताते हुए कहा था कि किसी भी बड़े पद पर आसीन होने से पहले अहंकार का त्याग करना अनिवार्य होता है. अखाड़े के प्रबंधन ने इस बयान को अनुशासनहीनता मानते हुए इसे बेहद गंभीरता से लिया और तत्काल कार्रवाई की.
अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने एक वीडियो संदेश जारी कर इस निष्कासन की औपचारिक घोषणा की. उन्होंने स्पष्ट किया कि ज्योतिष्पीठ का विवाद स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के बीच का पुराना मामला है, जिसके कई जटिल पहलू हैं. अखाड़ा इस विवाद में किसी भी पक्ष की ओर से शामिल नहीं होना चाहता और न ही इस पर कोई टिप्पणी करना चाहता है.
डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने आगे कहा कि ममतानंद गिरि ने अखाड़े की अनुमति के बिना इस संवेदनशील धार्मिक मामले में बयानबाजी की है. हालांकि अखाड़े ने माघ मेला के दौरान मौनी अमावस्या पर पुलिस द्वारा बटुकों पर किए गए लाठीचार्ज पर दुख व्यक्त किया था, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि वे इस पूरे विवाद से खुद को दूर रखते हैं. इसी आधार पर अनुशासन का उल्लंघन करने के लिए ममता को अखाड़े से बाहर करने का निर्णय लिया गया.
उल्लेखनीय है कि ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़ा ने 2025 के महाकुंभ के दौरान महामंडलेश्वर पद की उपाधि प्रदान की थी. इस नियुक्ति का उस समय भी कई अन्य संतों ने कड़ा विरोध किया था. पूर्व में भी ममता कुलकर्णी अपने विवादित बयानों के कारण चर्चा में रही हैं, जिसमें कुछ माह पहले दिया गया उनका वह बयान भी शामिल है जिसमें उन्होंने अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को आतंकवादी न होने की बात कही थी.
इस निष्कासन के बाद अब ममतानंद गिरि के पास अखाड़े की कोई आधिकारिक उपाधि या पद नहीं रह गया है. अखाड़े ने स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी सदस्य को बिना अनुमति के धार्मिक पीठों या शीर्ष संतों के खिलाफ टिप्पणी करने की स्वतंत्रता नहीं दी जाएगी. यह कदम अखाड़े की गरिमा और संतों के बीच आपसी सम्मान बनाए रखने की दिशा में उठाया गया माना जा रहा है.