झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: 'Zero FIR' न लिखना कानून का उल्लंघन, रेप पीड़िताओं के बच्चों को IIT-AIIMS तक मुफ्त शिक्षा
"झारखंड हाई कोर्ट ने यौन हिंसा की पीड़िताओं को त्वरित न्याय और सुरक्षा देने की दिशा में एक युगांतकारी फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब पुलिस क्षेत्राधिकार का बहाना बनाकर पीड़िताओं को दौड़ा नहीं सकती और 'Zero FIR' दर्ज करना अनिवार्य है.
Ranchi : महिलाओं और यौन हिंसा की पीड़िताओं के अधिकारों, सुरक्षा, न्याय और पुनर्वास को लेकर झारखंड हाई कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि किसी भी संज्ञेय अपराध, विशेषकर यौन हिंसा और पॉक्सो (POCSO) मामलों में पुलिस क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) का बहाना बनाकर FIR दर्ज करने से इनकार नहीं कर सकती। 'Zero FIR' दर्ज करना पुलिस की कानूनी जिम्मेदारी है और ऐसा न करना सीधे तौर पर कानून के उल्लंघन के समान माना जाएगा।
BNSS 2023 के तहत Zero FIR होगी अनिवार्य, DGP को मिले सख्त निर्देश
हाई कोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 173 के तहत 'Zero FIR' की व्यवस्था को पूरे राज्य में सख्ती से लागू कराया जाए। कोर्ट ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय कर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, पुलिसकर्मियों को पीड़िताओं के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए नियमित प्रशिक्षण और संवेदनशीलता कार्यक्रम चलाने के भी आदेश दिए गए हैं।
दुष्कर्म से जन्मे बच्चों के लिए अभूतपूर्व फैसला: IIT, NIT और AIIMS की पढ़ाई का खर्च उठाएगी सरकार
अदालत ने पीड़ित महिलाओं और उनके बच्चों के सामाजिक व आर्थिक पुनर्वास के लिए कई दूरगामी निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि हर जिले में एक 'नोडल अधिकारी' की नियुक्ति की जाए, जो दुष्कर्म से जन्मे बच्चों की शिक्षा और समग्र विकास की निगरानी करेगा।
- ऐसे बच्चों को 12वीं कक्षा तक मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।
- यदि कोई छात्र भविष्य में IIT, NIT, AIIMS या IIM जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश प्राप्त करता है, तो उसे उच्च शिक्षा के लिए सरकार द्वारा विशेष छात्रवृत्ति (Scholarship) का लाभ दिया जाएगा।
वन-स्टॉप सेंटरों की होगी कड़ाई से निगरानी, समय पर मिलेगी अंतरिम राहत
हाई कोर्ट ने पाया कि कई मामलों में पीड़िताओं को समय पर सहायता नहीं मिलती, जिससे न्याय की पूरी प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसे सुधारने के लिए अदालत ने महिला और बाल विकास विभाग को राज्यभर में 'वन-स्टॉप सेंटरों' की कार्यप्रणाली को मजबूत करने और उनकी नियमित निगरानी के लिए एक विशेष समिति बनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पीड़िताओं को तुरंत कानूनी और सामाजिक सहायता मिलनी चाहिए। इसके साथ ही, ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया गया है कि मुकदमे की शुरुआत में ही यह तय किया जाए कि पीड़िता को अंतरिम राहत (Interim Relief) देने की जरूरत है या नहीं।