बजट सत्र से भाग गए नेता प्रतिपक्ष, तेजस्वी की जनविश्वास यात्रा पर जीतनराम मांझी का प्रहार, संविधान की कर रहे अवहेलना

PATNA: बिहार विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है। वहीं दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव जनविश्वास यात्रा पर हैं। सत्र में नेता प्रतिपक्ष के उपस्थिति ना होने से सत्ता पक्ष के नेता लगातार सवाल खड़ा कर रहे हैं। इसी कड़ी में पूर्व सीएम और हम संरक्षक जीतनराम मांझी ने भी तेजस्वी यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि उनके 44 साल के राजनीतिक जीवन में पहली बार ऐसा हुआ है जब विरोधी दल के नेता प्रतिपक्ष सदन से गायब हैं।

पहली बार बजट सत्र से भागे नेता प्रतिपक्ष

जीतनराम मांझी ने कहा कि, यह तेजस्वी यादव का व्यक्तिगत मामला है। लेकिन पहला मौका है जब विपक्ष का नेता बजट सत्र से भागा हुआ है, वह सदन में बोलते उनको जो भी बोलना होगा। मीडिया के द्वारा उनकी बातें जनमानस के बीच में जाता। आज सब उनकी हसी उड़ा रहा है कि विपक्ष का नेता सदन से बाहर है। मेरे 44 साल के राजनीतिक जीवन में ऐसा पहली बार हुआ है जब सदन के बजट सत्र में नेता प्रतिपक्ष ना पहुंचा हो। 

संविधान के खिलाफ काम कर रहे तेजस्वी

उन्होंने कहा कि, बजट सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष का सदन में ना पहुंचना संविधान का अवहेलना है। साथ ही उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव जनता के बीच जाकर सीएम नीतीश के द्वारा किए गए कामों को अपना बता रहे हैं। सबको बोल रहे हैं कि हम काम किए हैं, जबकि कोई भी काम सीएम के हस्ताक्षर के बिना नहीं होता है। तेजस्वी ऐसे दिखा रहे हैं जैसे वह डिप्टी सीएम ना होकर सीएम ही थे।  

23 को कार्यकर्ता सम्मेलन

दरअसल, 23 फरवरी को बापू सभागार में जीतनराम मांझी की पार्टी हम कार्यकर्ता सम्मेलन करने वाली है। आज सम्मेलन के प्रचार प्रसार के लिए हम प्रमुख ने रथ को रवाना किया है। इसी दौरान उन्होंने तेजस्वी यादव पर जोरदार हमला बोला है।  वहीं आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर यह सम्मेलन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी के पंचायत स्तर पर करीब 15 हजार कार्यकर्ता इस सम्मेलन में शामिल होंगे।

15 हजार लोग होंगे शामिल

वहीं उन्होंने कहा कि, पंचायत स्तरीय कार्यकर्ताओं की बैठक होने वाली है, जिलों में प्रचार प्रसार किया जा रहा है, 10 हजार लोगों के लिए बापू सभागार में जगह है लेकिन 15 20 हजार लोग आएंगे। वहीं जीतन राम मांझी को लेकर राज्य की सियासत अक्सर गरमाई हुई रहती है। सरकार के कई निर्णयों को लेकर उनकी नाराजगी भी देखी गई है, हालांकि मांझी हर बार एनडीए के साथ मजबूती से खड़े रहने का दावा कर चुके हैं।