U19 वर्ल्ड कप फाइनल: वैभव सूर्यवंशी का तूफानी शतक, कप्तान आयुष ने ठोंकी हाफ सेचुरी

हरारे में वैभव सूर्यवंशी का तूफान! अंडर-19 विश्व कप के फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ वैभव ने मात्र 55 गेंदों में जड़ा ऐतिहासिक शतक। कप्तान आयुष म्हात्रे के अर्धशतक और वैभव की आतिशी पारी के दम पर भारत 10वें फाइनल में छठे खिताब की ओर मजबूती से बढ़ रहा है

N4N Desk - जिम्बाब्वे के हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले जा रहे अंडर-19 विश्व कप के फाइनल मुकाबले में भारतीय ओपनर वैभव सूर्यवंशी ने इतिहास रच दिया है। खिताबी मुकाबले के बड़े दबाव को दरकिनार करते हुए वैभव ने इंग्लैंड के गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने महज 55 गेंदों में अपना शानदार शतक पूरा किया, जो फाइनल जैसे बड़े मंच पर उनकी आक्रामक और निडर बल्लेबाजी का प्रमाण है। उनकी इस पारी ने भारतीय टीम को एक ऐसी शुरुआत दी है, जिसने इंग्लैंड के खेमे में खलबली मचा दी है।

कप्तान आयुष म्हात्रे का मिला ठोस साथ

 वैभव के दूसरे छोर पर कप्तान आयुष म्हात्रे ने भी एक कप्तानी पारी खेलते हुए टीम की स्थिति को और मजबूत किया। आयुष ने संभलकर खेलते हुए 53 रनों का योगदान दिया और वैभव के साथ मिलकर पहले विकेट के लिए एक विशाल साझेदारी की। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 21 ओवरों में ही 185 रनों का आंकड़ा पार कर लिया है। इन दोनों बल्लेबाजों की बदौलत भारत अब एक ऐसे विशाल स्कोर की ओर बढ़ रहा है, जिसे हासिल करना फाइनल के दबाव में किसी भी टीम के लिए नामुमकिन जैसा होगा।

रिकॉर्ड्स की ओर बढ़ता भारत का कारवां 

भारतीय टीम इस समय जूनियर क्रिकेट में अपने दबदबे का नया इतिहास लिख रही है। यह भारत का लगातार छठा और कुल 10वां अंडर-19 विश्व कप फाइनल है, जो अपने आप में एक विश्व रिकॉर्ड है। अब तक पांच बार (2000, 2008, 2012, 2018 और 2022) चैंपियन बन चुकी भारतीय टीम की नजरें अब 'खिताबी जीत का सिक्सर' लगाने पर टिकी हैं। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला हरारे की पिच पर पूरी तरह सही साबित हुआ है।

मुश्किल में इंग्लैंड और ऐतिहासिक चुनौती 

दूसरी ओर, इंग्लैंड की टीम भारत के इस आक्रमण के सामने बेबस नजर आ रही है। इंग्लैंड ने अब तक केवल एक बार (1998 में) यह खिताब जीता है और 28 साल बाद वे अपने दूसरे खिताब की तलाश में हैं। लेकिन जिस तरह से वैभव और आयुष ने बल्लेबाजी की है, इंग्लैंड के गेंदबाजों के लिए वापसी करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। अगर भारतीय टीम इसी गति से रन बनाती रही, तो इंग्लैंड को लक्ष्य का पीछा करने के लिए चमत्कारिक प्रदर्शन की जरूरत होगी।