Share Market Today : शेयर बाजार में 'ब्लैक वेडनेसडे', ईरान-इजरायल युद्ध के साये में सेंसेक्स 1710 अंक टूटा, निवेशकों के 10 लाख करोड़ स्वाहा

Share Market Today : शेयर बाजार में 'ब्लैक वेडनेसडे', ईरान-इ

N4N DESK : कमजोर वैश्विक संकेतों और ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव ने बुधवार को भारतीय शेयर बाजार को हिलाकर रख दिया। चौतरफा बिकवाली के चलते निवेशकों की संपत्ति में महज कुछ ही घंटों में करीब 10 लाख करोड़ रुपये की भारी कमी आई है। इस गिरावट के साथ BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर 454 लाख करोड़ रुपये रह गया है। बड़े शेयरों के साथ-साथ ब्रॉड मार्केट में आई इस कमजोरी ने बाजार के कुल वैल्यूएशन पर जबरदस्त दबाव डाला है।

सेंसेक्स और निफ्टी की 'गैप-डाउन' शुरुआत

4 मार्च को बाजार की शुरुआत किसी बुरे सपने जैसी रही। प्री-ओपनिंग सेशन में ही भारी गिरावट के संकेत मिल गए थे, जब सेंसेक्स 3000 अंक और निफ्टी 700 अंकों से ज्यादा टूट गया था। बाजार खुलते ही सेंसेक्स 1,710 अंक गिरकर 78,528 पर आ गया, वहीं निफ्टी 476 अंकों की गिरावट के साथ 24,388 के स्तर पर खुला। इंडेक्स के ओपनिंग लेवल ही आज के हाई और लो के करीब बने रहे, जो यह दर्शाता है कि बाजार में शुरुआत से ही बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि संभलने का मौका ही नहीं मिला। खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 1575 अंक गिर चुका था. जबकि निफ्टी में 478 अंकों की गिरावट दर्ज की गयी थी. 

इन शेयरों ने बढ़ाया बाजार पर दबाव (Top Losers)

आज के कारोबार में निफ्टी के अधिकांश हैवीवेट शेयर लाल निशान में नजर आए। सबसे ज्यादा मार L&T (Larsen & Toubro) पर पड़ी, जिसमें करीब 6% की भारी गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा मेटल और फाइनेंशियल सेक्टर में भी जबरदस्त बिकवाली रही। टाटा स्टील, श्रीराम फाइनेंस और अदाणी पोर्ट्स जैसे दिग्गज स्टॉक्स टॉप लूजर्स की सूची में शामिल रहे, जिससे बाजार की धारणा पूरी तरह नकारात्मक बनी रही।

इन सेक्टर्स ने संभालने की कोशिश की (Top Gainers)

बाजार में मची इस हाहाकार के बीच कुछ चुनिंदा सेक्टरों ने सहारा देने की कोशिश की। डिफेंस, आईटी और ऑयल शेयरों में हल्की खरीदारी देखी गई। कोल इंडिया, ओएनजीसी (ONGC), इंफोसिस और बीईएल (BEL) जैसे शेयरों ने बाजार को कुछ हद तक सपोर्ट दिया। हालांकि, यह बढ़त इतनी मामूली थी कि निफ्टी और सेंसेक्स को बड़े नुकसान से बचाने में नाकाम रही।

भू-राजनीतिक तनाव का असर

विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के रुख पर पड़ रहा है। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति की कोई ठोस खबर नहीं आती, तब तक भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव और अस्थिरता का यह दौर जारी रहने की संभावना है।