ताजमहल और पेठे के अलावा 'आगरे का पागलखाना' भी है दुनिया में मशहूर, जानिए 1857 की क्रांति से जुड़ा इसका अनोखा इतिहास
ताजनगरी आगरा पूरी दुनिया में अपने बेमिसाल ताजमहल के लिए मशहूर रो है ही, लेकिन इन सबके अलावा आगरा काे पागलखाना की भी पूरी दुनिया में चर्चे रही है। इस पागलखाना के बनने को लेकर एक बेहद दिलचस्प कहानी जुड़ी है। पढ़िए .....
N4N Desk : ताजनगरी आगरा पूरी दुनिया में अपने बेमिसाल ताजमहल, स्वादिष्ट पेठे और चमड़े के जूतों के लिए मशहूर है। लेकिन इन सबके अलावा, एक और चीज़ है जिसके चर्चे देश-दुनिया में रहे हैं—वह है 'आगरे का पागलखाना'। हालांकि, अब समय बदल चुका है और इसे 'मानसिक आरोग्यशाला' (इन्स्टीट्यूट ऑफ मैन्टल हेल्थ एंड हॉस्पिटल) के नाम से जाना जाता है। पर क्या आप जानते हैं कि आगरा में इस मानसिक चिकित्सालय के निर्माण के पीछे 1857 के स्वतंत्रता संग्राम और एक अंग्रेज अफसर के पागल होने की बेहद दिलचस्प कहानी छिपी है? आइए जानते हैं इसका पूरा इतिहास।
जब 1857 की क्रांति से घबरा गया अंग्रेज अफसर
इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि आगरा शुरू से ही क्रांतिकारियों का एक मजबूत गढ़ रहा था। साल 1857 में जब देश का पहला स्वतंत्रता संग्राम भड़का, तो उसकी गूंज आगरा तक भी पहुंची। एक तरफ झांसी में रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों को लोहे के चने चबा रही थीं, तो दूसरी तरफ मेरठ के सैनिक विद्रोही हो चुके थे। आगरा में भी क्रांति के बादल गरज रहे थे। क्रांतिकारियों के इस बढ़ते आक्रोश और उनकी रणनीति को देखकर आगरा किले का प्रभारी और तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर जॉन रसेल कल्विन (John Russell Colvin) पूरी तरह घबरा गया।
खौफ के चलते मानसिक संतुलन खो बैठा कल्विन
क्रांतिकारियों का खौफ कल्विन के दिमाग पर इस कदर हावी हुआ कि वह अपनी दिमागी हालत खो बैठा और पागल हो गया। इसी मानसिक तनाव के बीच उसे हैजा (Cholera) नामक बीमारी ने भी जकड़ लिया। आखिरकार, दिमागी संतुलन बिगड़ने और बीमारी के चलते किले के भीतर ही उसकी मौत हो गई। कल्विन की मौत के बाद अंग्रेज अफसरों ने उसे आगरा किले के अंदर ही दफना दिया। आज भी कल्विन की वह कब्र आगरा किले के 'दीवान-ए-आम' के ठीक सामने मौजूद है, जिसके पास ब्रिटिश जमाने की एक तोप भी रखी हुई है।
कोलकाता में हुआ था कल्विन का जन्म
अगर जॉन रसेल कल्विन के इतिहास पर नज़र डालें, तो उसका जन्म 19 मई 1807 को कोलकाता (तब बंगाल प्रेसिडेंसी) में हुआ था। वह एंग्लो-इंडियन मूल का था। कल्विन की उच्च शिक्षा इंग्लैंड के हर्टफोर्डशायर स्थित ईस्ट इंडिया कंपनी कॉलेज में हुई थी, जिसके बाद वह भारत में ब्रिटिश हुकूमत का एक बड़ा प्रशासनिक अधिकारी बना था।
क्वीन विक्टोरिया ने रखवाई अस्पताल की नींव
इतिहासकार राजकिशोर राजे के मुताबिक, कल्विन की इस दर्दनाक मौत और उसकी मानसिक स्थिति की रिपोर्ट जब ब्रिटेन पहुंची, तो ब्रिटिश हुकूमत हिल गई। इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने यह निर्णय लिया कि आगरा में अंग्रेज सैनिकों और अधिकारियों के इलाज के लिए एक विशेष मानसिक अस्पताल बनाया जाए। इसी रिपोर्ट के आधार पर ब्रिटेन की क्वीन विक्टोरिया ने आगरा में इस मानसिक चिकित्सालय का निर्माण करवाया, जिसे आज हम आगरा मानसिक आरोग्यशाला के नाम से जानते हैं।