West Bengal Election : सयानी के 'सुर' और तेजस्वी के 'नारे' ने डुबोई टीएमसी की कश्ती, भवानीपुर भी नहीं बचा पाईं ममता, पहली बार खिला 'कमल’

उमा भारती ने टीएमसी सांसद सियानी घोष के एक गाने को हार का बड़ा कारण बताया है। वहीँ भाजपा ने तेजस्वी को टीएमसी की हार के लिए जिम्मेवार बताया है......पढ़िए आगे

टीएमसी की हार की वजह - फोटो : SOCIAL MEDIA

N4N DESK : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की करारी हार हुई है। जबकि पहली बार बंगाल में कमल खिला है। 200 से अधिक सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवारों ने बाजी मारी है। यहाँ तक की खुद ममता बनर्जी भी भवानीपुर सीट से चुनाव हार गयी हैं। हालाँकि ममता बनर्जी की किला ढहने के कई कारण है। लेकिन कई प्रमुख नाम लिए जा रहे हैं, जो टीएमसी के हार के कारण बताये जा रहे हैं। इसमें सबसे पहले नाम आता है टीएमसी सांसद सयानी घोष का। जो जादवपुर से लोकसभा सांसद हैं। माना जा रहा है की उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान एक गाना गया। जिसने मतदाताओं में गलत संदेश दिया। 

उमा भारती ने टीएमसी सांसद सयानी घोष का एक वीडियो 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए ममता बनर्जी पर तंज कसा। उन्होंने कहा, ''बंगाल की जीत के लिए मोदी जी, अमित शाह जी, नितिन नवीन जी और बंगाल के असंख्य कार्यकर्ताओं को बधाई एवं अभिनंदन। अबकी बार जीत तो हमारी होनी ही थी। लेकिन ममता बनर्जी की ही पार्टी की एक सांसद का गाना ममता जी को ले डूबा।''

सयानी घोष का जन्म 27 जनवरी, 1993 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ था। सायानी ने अपने करियर की शुरुआत टेलीफिल्मों में अभिनय से की। उसके बाद वह बंगाली फिल्मों में काम करने लगीं। सायानी 16 जनवरी, 2021 में अचानक चर्चा में आ गईं। वह अपनी सोशल मीडिया में की गई एक पोस्ट को लेकर विवादों में आईं। बंगाली फिल्म ऐक्ट्रेस का हिंदूफोबिक ट्वीट सोशल मीडिया में वायरल हो गया। हालांकि यह ट्वीट 2015 का था। 18 फरवरी 2015 को इस ट्वीट में सयानी ने एक तस्वीर पोस्ट की थी जिसमें वह शिवलिंग को कंडोम पहनाती नजर आ रही थीं। उन्होंने इस फोटो में कैप्शन लिखा, 'Gods cudnt have been more useful' मिला जुलाकर सयानी का हिन्दू विरोधी छवि ने ममता बनर्जी को कई सीटों पर मुश्किल खड़ी कर दी।

इसके बाद ममता के कहने पर तेजस्वी यादव बंगाल पहुंचे थे। ममता बनर्जी को विश्वास था की तेश्वी के कहने पर हिंदी भाषी ममता बनर्जी को वोट देंगे। लेकिन जैसे बिहार के लोगों ने तेजस्वी को नकार दिया। ऐसे ही बंगाल के लोगों ने भी तेजस्वी को नकार दिया। यहाँ तक की उनका दिया जय बांगला,,जय बिहार का नारा भी काम नहीं आया। बंगाल में 14 सीटों पर तेजस्वी ने चुनाव प्रचार किया। जहाँ 13 सीटों पर टीएमसी को हार का सामना करना पड़ा।  भाजपा ने तंज कसते हुए कहा की मंजिल की तलाश में निकले थे हमसफ़र बनकर, मगर जहाँ-जहाँ गए, वहां की कश्ती ही डुबो आए! "खुद की जमीन खिसकी हुई है और चले थे दूसरों का सहारा बनने।"