त्रिशुली नदी में गिरी तेज रफ्तार बस, 18 यात्रियों की मौत, दर्जनों की हालत गंभीर

नेपाल के धादिंग जिले में सोमवार तड़के हुआ यह बस हादसा वाकई हृदयविदारक है। त्रिशूली नदी का तेज बहाव और पहाड़ी रास्तों की चुनौतियां अक्सर ऐसे हादसों को और भी गंभीर बना देती हैं।

N4N Desk - नेपाल के धादिंग जिले में सोमवार तड़के एक भीषण सड़क हादसा हुआ, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। पोखरा से काठमांडू की ओर जा रही एक यात्री बस अनियंत्रित होकर त्रिशूली नदी में जा गिरी। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 18 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि दर्जनों लोग घायल हैं।

आधी रात के अंधेरे में हुआ हादसा

काठमांडू पोस्ट के अनुसार, यह भीषण दुर्घटना रात करीब 1:15 बजे बेनीघाट रोरांग ग्रामीण नगरपालिका के चिनाधारा (चारौंदी) के पास हुई। बस (नंबर GA 1 KHA 1421) पृथ्वी हाईवे से फिसलकर सीधे त्रिशूली नदी की गहराई में जा समाई। हादसे के समय बस में 35 से अधिक यात्री सवार थे, जिनमें से अधिकांश सो रहे थे।

रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी सुरक्षा एजेंसियां

हादसे की सूचना मिलते ही नेपाल की आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF), नेपाली सेना और नेपाल पुलिस के जवान मौके पर पहुंच गए। APF के प्रवक्ता बिष्णु प्रसाद भट्टा ने बताया कि रात का समय और नदी का तेज बहाव बचाव कार्य में बड़ी बाधा बन रहे थे। हालांकि, स्थानीय लोगों की मदद से सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाला और मलबे से लोगों को निकालना शुरू किया।

हताहतों का आंकड़ा और घायलों की स्थिति

धादिंग जिला ट्रैफिक पुलिस प्रमुख शिशिर थापा ने पुष्टि की है कि मृतकों की संख्या बढ़कर 18 हो गई है। हाईवे रेस्क्यू मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष राजकुमार थाकुरी के अनुसार, 25 घायलों को नदी से निकालकर तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहाँ कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है।

चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियां

नेपाल के पहाड़ी रास्तों पर सड़क हादसे एक बड़ी समस्या बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर बुनियादी ढांचा, पुराने वाहन और दुर्गम भौगोलिक स्थिति अक्सर ऐसे हादसों का कारण बनती है। त्रिशूली नदी अपनी तेज धारा के लिए जानी जाती है, जिससे बस के नदी में गिरते ही यात्रियों के बचने की संभावना काफी कम हो गई थी।

जांच के घेरे में हादसे के कारण

फिलहाल हादसे के सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या दुर्घटना तकनीकी खराबी की वजह से हुई या फिर चालक की लापरवाही या नींद की झपकी इसका कारण थी। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता मृतकों की पहचान करने और घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराने पर है।