बिहार में इस दिन से मानसून की बारिश, भीषण गर्मी से राहत वाली आई खबर, दो दिन रहिए सतर्क
भीषण गर्मी की मार झेल रहे बिहार के लोगों का मानसून का इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है. इसे लेकर मौसम विभाग के पूर्वानुमान में बड़ी राहत भरी खबर है.
Monsoon in Bihar : मानसून का इंतजार कर रहे बिहार के लोगों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। तीन दिन की देरी से देश में प्रवेश करने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने अब रफ्तार पकड़ ली है। केरल में 4 जून को दस्तक देने के बाद मानसून कर्नाटक, तमिलनाडु, गोवा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, मिजोरम और मणिपुर तक पहुंच चुका है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार अगले कुछ दिनों में मानसून पूर्वोत्तर भारत के शेष राज्यों और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों तक आगे बढ़ सकता है, जबकि बिहार में इसके अगले 10 दिनों के भीतर पहुंचने की संभावना जताई गई है।
दरअसल, भीषण गर्मी की मार झेल रहे बिहार के लोगों को अभी मानसून का इंतजार करना होगा, लेकिन उससे पहले मौसम करवट लेने वाला है। मौसम विभाग ने 8 और 9 जून को राज्य के कई जिलों में गरज-चमक, तेज हवाओं और बारिश की संभावना जताई है। पटना समेत कई जिलों के लिए आंधी और वज्रपात का अलर्ट जारी किया गया है। कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। सोमवार को अररिया, कटिहार, किशनगंज, मधुबनी, पूर्णिया, सीतामढ़ी और सुपौल में भारी वर्षा को लेकर चेतावनी जारी की गई है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बिहार में मानसून की सामान्य आगमन तिथि 12 से 15 जून के बीच मानी जाती है। हालांकि इस बार मानसून की शुरुआत थोड़ी देर से हुई थी, लेकिन अब इसकी प्रगति तेज हुई है। IMD का अनुमान है कि यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो जून के दूसरे पखवाड़े की शुरुआत तक मानसून बिहार के अधिकांश हिस्सों को कवर कर सकता है।
इस बीच बिहार में प्री-मानसून गतिविधियां बढ़ रही हैं। रविवार और सोमवार को राज्य के कई हिस्सों में बादल छाए रहने, गरज के साथ बारिश और बिजली चमकने की संभावना है। इससे पिछले कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी और उमस से लोगों को कुछ राहत मिल सकती है।
हालांकि मौसम विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि इस वर्ष बिहार में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। IMD के दीर्घकालिक पूर्वानुमान के अनुसार जून से सितंबर के मानसून सीजन में राज्य में औसत से कम बारिश होने की आशंका है। इसके पीछे प्रशांत महासागर में विकसित हो रही एल-नीनो परिस्थितियों को प्रमुख कारण माना जा रहा है। साथ ही जून महीने में सामान्य से अधिक गर्म दिनों और हीटवेव की घटनाओं की भी संभावना बनी हुई है।