प्याज की कमी लेकर बड़ा अपडेट, आपके यहाँ भी है यह दिक्कत तो जरुर जान लें HPEA का ऐलान
प्याज की कमी को लेकर इन दिनों कुछ मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर अलग अलग तरह की खबरें आ रही हैं, इन सबके बीच प्याज की उपलब्धता को लेकर बड़ा अपडेट आ गया है जो ग्राहकों के लिए राहत भरी खबर है
Onion Shortage Fears in India : देश में प्याज की संभावित कमी और बढ़ती कीमतों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच बड़ी राहत देने वाली खबर सामने आई है। हॉर्टिकल्चरल प्रोड्यूस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (HPEA) ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल देश में प्याज की कोई कमी होने की आशंका नहीं है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में पर्याप्त मात्रा में प्याज का स्टॉक उपलब्ध है और बाजार में आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। इससे देश के किसी भी राज्य को घबराने की जरूरत नहीं है।
एचपीईए के उपाध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि मौजूदा उपलब्ध जानकारी के आधार पर प्याज की उपलब्धता को लेकर चिंता की कोई वजह नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रमुख उत्पादक राज्यों में भंडारित प्याज पर्याप्त मात्रा में मौजूद है और निकट भविष्य में आपूर्ति संकट के कोई संकेत नहीं हैं। उनके अनुसार, बाजार की बुनियादी स्थिति फिलहाल स्थिर है।
कम गुणवत्ता वाले प्याज की आवक अधिक
हालांकि, एसोसिएशन ने यह भी बताया कि इन दिनों मंडियों में अपेक्षाकृत कम गुणवत्ता वाले प्याज की आवक अधिक हो रही है। अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज को व्यापारी अभी भंडारण में रखे हुए हैं और उन्हें बाद में, विशेषकर कम आपूर्ति वाले समय में बाजार में उतारने की योजना है। हाल के दिनों में कुल आवक में मामूली गिरावट जरूर दर्ज की गई है, लेकिन इससे आपूर्ति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ रहा है।
इस कारण बढ़ी खरीद
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ इलाकों में सामान्य से कम बारिश होने के कारण कुछ व्यापारियों ने सट्टेबाजी के उद्देश्य से प्याज की खरीद बढ़ा दी है। हालांकि देश के प्रमुख उपभोक्ता बाजारों में मौजूदा कीमतों पर मांग में कोई खास तेजी नहीं देखी जा रही है। नासिक और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में जो खरीदारी हो रही है, वह वास्तविक मांग की बजाय भविष्य में कीमत बढ़ने की उम्मीद पर आधारित बताई जा रही है।
निर्यात में बड़ी गिरावट
एचपीईए ने यह भी बताया कि प्याज के निर्यात में इस वर्ष बड़ी गिरावट आई है। मौजूदा समय में निर्यात पिछले साल की तुलना में केवल 25 से 30 प्रतिशत के आसपास रह गया है। इसका मुख्य कारण पाकिस्तान और चीन की नई फसल का अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध होना है। खाड़ी देशों, श्रीलंका और सुदूर पूर्व के बाजारों में इन देशों का प्याज अधिक प्रतिस्पर्धी साबित हो रहा है, जिससे भारतीय प्याज की मांग प्रभावित हुई है।
बेहतर उम्मीद
दक्षिण भारत की फसल को लेकर भी रिपोर्ट में सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। कर्नाटक के चित्रदुर्ग और चल्लकेरे क्षेत्र में सामान्य से करीब 60 प्रतिशत बुवाई हुई है। हालांकि यह पिछले वर्ष से कम है, लेकिन कम बारिश के कारण इस बार प्याज की गुणवत्ता बेहतर रहने की उम्मीद जताई गई है। पिछले वर्ष अधिक वर्षा के कारण फसल प्रभावित हुई थी।
एसोसिएशन के अनुसार, 15 अगस्त के बाद कर्नाटक से प्याज की आवक बढ़ने लगेगी, जिससे बाजार में आपूर्ति और मजबूत होगी। वहीं सितंबर के अंत और अक्टूबर के दौरान कर्नाटक के धारवाड़, हुबली, बेलगावी, बागलकोट तथा महाराष्ट्र के सोलापुर से नई फसल मंडियों में पहुंचने लगेगी। इससे आने वाले महीनों में भी प्याज की उपलब्धता बनी रहने की संभावना है।