Congress: जहां कांग्रेस की सरकार, वहीं EVM पर 85 फीसदी लोगों का भरोसा! BJP का राहुल गांधी पर पलटवार, ‘वोट चोरी’ बनाम ‘जनविश्वास’ की जंग तेज
Congress: एक सर्वेक्षण ने नई सियासी आग भड़का दी है। ईवीएम पर मतदाताओं के भरोसे को लेकर किए गए इस अध्ययन को लेकर जहां भाजपा इसे कांग्रेस की ‘वोट चोरी’ थ्योरी पर करारा तमाचा बता रही है...
Congress: एक सर्वेक्षण ने नई सियासी आग भड़का दी है। ईवीएम पर मतदाताओं के भरोसे को लेकर किए गए इस अध्ययन को लेकर जहां भाजपा इसे कांग्रेस की ‘वोट चोरी’ थ्योरी पर करारा तमाचा बता रही है, वहीं कांग्रेस ने सर्वे की नीयत, नक्शा और नमूने पर सवाल उठाकर पलटवार किया है। नतीजा यह कि ईवीएम से ज्यादा चर्चा अब राजनीति की जुबान और इरादों की हो रही है।
कर्नाटक निगरानी एवं मूल्यांकन प्राधिकरण द्वारा कराए गए इस सर्वे में 5,100 मतदाताओं से उनके ज्ञान, दृष्टिकोण और व्यवहार को लेकर सवाल पूछे गए। सर्वे के मुताबिक 85 प्रतिशत मतदाताओं ने ईवीएम पर भरोसा जताया और 2024 के लोकसभा चुनाव को स्वतंत्र व निष्पक्ष करार दिया। यही आंकड़े भाजपा के लिए सियासी हथियार बन गए।
भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर खुशी जाहिर करते हुए लिखा कि कांग्रेस की ‘वोट चोरी’ थ्योरी एक बार फिर बेनकाब हो गई है। उनके मुताबिक यह रिपोर्ट साबित करती है कि देश की जनता को चुनाव प्रक्रिया और लोकतंत्र पर पूरा यकीन है। पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के बेटे विजयेंद्र ने इसे राहुल गांधी पर सीधा हमला बताते हुए कहा कि चुनावी हार को स्वीकार न कर पाने की झुंझलाहट में कांग्रेस चुनाव आयोग पर शक का माहौल बना रही है।
लेकिन कांग्रेस खेमे में इस सर्वे को लेकर शक की सुई लगातार घूम रही है। कर्नाटक के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियांक खड़गे ने साफ शब्दों में कहा कि यह सर्वे राज्य सरकार द्वारा न तो स्वीकृत है और न ही आदेशित। उन्होंने सर्वे को डिजाइन और संचालित करने वाली एजेंसी, उसके सैंपल साइज और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। प्रियांक खड़गे ने दावा किया कि यह पहल राज्य सरकार की नहीं, बल्कि चुनाव आयोग के अनुरोध पर एक गैर-सरकारी संगठन की मदद से की गई।
कांग्रेस का आरोप यहीं नहीं थमता। प्रियांक खड़गे ने भाजपा से कलबुर्गी और आलंद में कथित ‘वोट चोरी’ पर जवाब मांगा। उन्होंने राहुल गांधी के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2023 के कर्नाटक और 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाने में भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत रही।
बहरहाल ईवीएम पर भरोसे का यह सर्वे लोकतांत्रिक विश्वास का आईना कम और सियासी टकराव का मैदान ज्यादा बन गया है। सवाल अब यह नहीं कि जनता क्या सोचती है, सवाल यह है कि इस सोच की ताबीर कौन और कैसे करेगा।