Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में 5 नए जजों ने ली शपथ, महिला प्रतिनिधित्व को मिली नई मजबूती

Supreme Court:भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सर्वोच्च न्यायालय के पांच नवनियुक्त न्यायाधीशों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। ../.

Five New Judges Sworn In Supreme Court Strength Rises to 37
सुप्रीम कोर्ट में 5 नए जजों ने ली शपथ- फोटो : social Media

Supreme Court:भारत के मुख्य न्यायाधीश  सूर्यकांत  ने  सर्वोच्च न्यायालय के पांच नवनियुक्त न्यायाधीशों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस नियुक्ति के साथ ही देश की सर्वोच्च अदालत की न्यायिक क्षमता और मजबूत हो गई है। शपथ ग्रहण करने वाले नए न्यायाधीशों में शील नागू, चन्द्रशेखर, संजीव सचदेवा, अरुण पल्ली और बुजुर्ग वी मोहना शामिल हैं। इन सभी ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में शपथ लेकर अपनी नई जिम्मेदारियों का कार्यभार संभाल लिया।

इन नियुक्तियों की सबसे विशेष बात यह रही कि वरिष्ठ अधिवक्ता वी मोहना को सीधे बार से बेंच पर नियुक्त किया गया है। आमतौर पर उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों या वरिष्ठ न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किया जाता है, लेकिन वी मोहना की सीधी नियुक्ति को न्यायिक जगत में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पांच नए न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण के बाद सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की कुल संख्या बढ़कर 37 हो गई है। हाल ही में केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। उसी निर्णय के तहत इन नई नियुक्तियों का मार्ग प्रशस्त हुआ।

महिला प्रतिनिधित्व के दृष्टिकोण से भी यह नियुक्ति बेहद अहम मानी जा रही है। वी मोहना के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद शीर्ष अदालत में महिला न्यायाधीशों की संख्या बढ़ गई है। इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय में केवल बी.वी. नागरत्ना ही महिला न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थीं। अगस्त 2021 के बाद पहली बार किसी महिला को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

कानूनी और न्यायिक हलकों में इन नियुक्तियों को लंबित मामलों के त्वरित निपटारे, न्यायिक कार्यों की गति बढ़ाने और सर्वोच्च न्यायालय की कार्यक्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नए न्यायाधीशों के शामिल होने से अदालत में बढ़ते मामलों के बोझ को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।देश की सर्वोच्च अदालत में यह विस्तार न्यायपालिका के लिए एक नया अध्याय माना जा रहा है, जो आने वाले समय में न्यायिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी तथा समावेशी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।