Support for Umar Khalid in JNU: जेएनयू में दिल्ली दंगे के आरोपी उमर खालिद के समर्थन में निकाला गया जुलूस, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ जमकर हुई विवादित नारेबाज़ी

Support for Umar Khalid in JNU: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) परिसर में बीती रात उस वक्त सनसनी फैल गई, जब विवादित नारेबाज़ी और जुलूस ने माहौल को संगीन बना दिया। ....

March at JNU Backs Umar Khalid Slogans Raised Against SC Ver
जेएनयू में दिल्ली दंगे के आरोपी उमर खालिद के समर्थन में हुई विवादित नारेबाज़ी - फोटो : social Media

Support for Umar Khalid in JNU: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) परिसर में बीती रात उस वक्त सनसनी फैल गई, जब विवादित नारेबाज़ी और जुलूस ने माहौल को संगीन बना दिया। कैंपस के भीतर कुछ छात्र समूहों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के ख़िलाफ़ नारे लगाए गए, वहीं दिल्ली दंगों के आरोपी उमर ख़ालिद के समर्थन में जुलूस निकालने की बात सामने आई है। अचानक भड़के इस सियासी शोर-शराबे ने कैंपस की शांति को झकझोर कर रख दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक देर रात छात्रों का एक समूह नारे लगाता हुआ हॉस्टल इलाक़े से गुज़रा। नारेबाज़ी की आवाज़ें दूर तक गूंजती रहीं, जिससे कई छात्र असहज हो गए। कुछ छात्रों ने इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी बताया, तो वहीं दूसरे तबके ने इसे क़ानून-व्यवस्था के लिए चुनौती करार दिया। हालात की नज़ाकत को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन सतर्क हो गया और सुरक्षा एजेंसियों को सूचना दी गई।

यह घटनाक्रम ऐसे वक्त में सामने आया है, जब सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली दंगों के आरोपी उमर ख़ालिद और शरजील इमाम को ज़मानत देने से इनकार कर दिया। अदालत के इस फ़ैसले के बाद सियासी पारा पहले से ही चढ़ा हुआ था। शीर्ष अदालत ने साफ़ कहा कि उमर ख़ालिद और शरजील इमाम एक साल तक इस मामले में दोबारा ज़मानत याचिका दाख़िल नहीं कर सकते।

कानूनी जानकारों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फ़ैसला बेहद अहम है और इससे जुड़े उबाल का असर कैंपस राजनीति में दिखना लाज़िमी था। जेएनयू प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह की अवैधानिक गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कैंपस में अतिरिक्त निगरानी बढ़ा दी गई है और घटनाक्रम की रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक स्थानीय पुलिस भी हालात पर पैनी नज़र बनाए हुए है। वीडियो फुटेज और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे क्लिप्स की तफ्तीश की जा रही है, ताकि यह तय किया जा सके कि नारेबाज़ी और जुलूस विश्वविद्यालय के नियमों और क़ानून की हदों के भीतर थे या नहीं।

फिलहाल जेएनयू कैंपस में सन्नाटा तो लौट आया है, मगर इस रात की गूंज सियासी और कानूनी हलकों में लंबे समय तक सुनाई देती रहेगी।