भारत से अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजने के आंकड़ों ने उड़ाए होश, यूपीए की तुलना में एनडीए सरकार बनने के बाद बड़ा फर्क

 बांग्लादेशी नागरिकों को लेकर इन दिनों पश्चिम बंगाल चुनाव के पहले लगातार सियासी बयानबाजी जारी है. इस बीच विदेश मंत्रालय के आंकड़े होश उड़ा रहे हैं.

 illegal Bangladeshi nationals deported from India
illegal Bangladeshi nationals deported from India- फोटो : news4nation

Illegal Bangladeshi : भारत से अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को बाहर निकाले जाने का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों पर आधारित साल-दर-साल डेटा यह दिखाता है कि यूपीए सरकार और 2014 के बाद बनी एनडीए सरकार के कार्यकाल में बांग्लादेशी नागरिकों की डिपोर्टेशन की संख्या में किस तरह बड़ा उतार–चढ़ाव देखने को मिला है।


डेटा के मुताबिक वर्ष 2006 से 2013 के बीच, यानी यूपीए सरकार के दौर में, भारत से निकाले गए बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या लगातार ऊंचे स्तर पर रही। 2006 में यह आंकड़ा करीब 13.7 हजार रहा, जबकि 2007 और 2008 में भी 12 हजार से अधिक बांग्लादेशी नागरिकों को भारत से डिपोर्ट किया गया। 2009 में यह संख्या करीब 10.6 हजार रही। इसके बाद 2010 से 2013 के बीच आंकड़ों में गिरावट जरूर आई, लेकिन फिर भी हर साल हजारों की संख्या में डिपोर्टेशन होती रही।

2014 के बाद तेज गिरावट 

2014 में केंद्र में एनडीए सरकार बनने के बाद इस आंकड़े में तेज गिरावट दर्ज की गई। 2014 में डिपोर्ट किए गए बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या घटकर करीब 989 रह गई। इसके बाद 2015 में यह संख्या 474, 2016 में 308 और 2017 में महज 51 तक सिमट गई। 2018 और उसके बाद के वर्षों में यह आंकड़ा कुछ बढ़ा जरूर, लेकिन फिर भी यह सैकड़ों तक ही सीमित रहा। 2024 (मार्च तक) के आंकड़ों के अनुसार यह संख्या लगभग 411 बताई गई है।

पश्चिम बंगाल में सियासी मुद्दा 

इन आंकड़ों के बीच भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को लेकर शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। खास तौर पर पश्चिम बंगाल को लेकर इस मुद्दे पर सियासत गर्म रहती है। इसी साल पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में अवैध घुसपैठ और बांग्लादेशी नागरिकों का मुद्दा एक बड़ा चुनावी विषय बन सकता है।

अमित शाह ने बनाया चुनावी मुद्दा 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले भी कई मौकों पर इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते रहे हैं। उन्होंने अवैध घुसपैठ को देश की आंतरिक सुरक्षा से जोड़ते हुए सख्त कार्रवाई की बात कही है। भाजपा लगातार आरोप लगाती रही है कि कुछ राज्यों में राजनीतिक संरक्षण के चलते अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। कुल मिलाकर गृह मंत्रालय के ये आंकड़े न सिर्फ अलग-अलग सरकारों के दौर में डिपोर्टेशन की स्थिति को सामने रखते हैं, बल्कि आने वाले चुनावों में अवैध घुसपैठ को लेकर सियासी बहस को और तेज करने वाले माने जा रहे हैं।


NDA में क्यों बदला आंकड़ा 

वर्ष 2006 से 2013 के बीच जहां प्रति वर्ष हजारों की संख्या में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को बाहर निकाले जाने के आंकड़े हैं वहीं 2014 के बाद इस संख्या में आई कमी कई प्रमुख कारण है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो इसमें केंद्र में एनडीए सरकार बनने के बाद अवैध घुसपैठ पर रोक को लेकर सरकार की ओर से दिखाई गई सख्ती है। इससे अवैध बांग्लादेशी लोगों का भारत आना कम हुआ तो उसी आधार पर यहां से वापसी भी कम हुई जिस कारण NDA सरकार में यह संख्या यूपीए से कम है ।