Jaish-e-Mohammed terrorists: जमीन के नीचे जिहादी अड्डा! 12 हजार फीट की ऊंचाई पर तीन माह का मिला राशन, साइलेंट वार के खौफनाक खुलासे से मचा हड़कंप
Jaish-e-Mohammed terrorists: करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर आतंकियों का एक ऐसा पुख्ता और सुरक्षित ठिकाना मिला, जो पहाड़ काटकर जमीन के नीचे बनाया गया था। इस गुप्त अड्डे में तीन महीने का पूरा राशन और रोजमर्रा का सामान देखकर अफसर दंग रह गए।
Jaish-e-Mohammed terrorists: बड़ा राजफाश हुआ तो सुरक्षा एजेंसियों की पेशानी पर बल डाल दिए। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के सोनम गांव में चल रहा आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन मंगलवार को तीसरे दिन भी जारी रहा, लेकिन इस बीच मुठभेड़ स्थल से महज दो किलोमीटर दूर, करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर आतंकियों का एक ऐसा पुख्ता और सुरक्षित ठिकाना मिला, जो पहाड़ काटकर जमीन के नीचे बनाया गया था। इस गुप्त अड्डे में तीन महीने का पूरा राशन और रोजमर्रा का सामान देखकर अफसर दंग रह गए।
यह कोई अस्थायी डेरा नहीं, बल्कि पूरी प्लानिंग के साथ खड़ा किया गया अंडरग्राउंड जिहादी बेस था। ठिकाने में आने-जाने के कई गुप्त रास्ते थे और एक वक्त में छह से ज्यादा आतंकी आराम से रह सकते थे। गैस सिलेंडर, चूल्हा, 15 किस्म के मसाले, 50 पैकेट मैगी, 20 किलो बासमती चावल, आटा, देसी घी, तेल, अनाज, सब्जियां, कंबल और अन्य साजो-सामान बरामद हुआ। हिसाब लगाया जाए तो छह आतंकी यहां तीन महीने तक चैन से खा-पी सकते थे।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी दुर्गम पहाड़ी और घने जंगलों के बीच इतना भारी सामान आखिर पहुंचा कैसे? सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि स्थानीय मददगारों के बिना यह मुमकिन ही नहीं। इसी शक के आधार पर सेना ने करीब 30 लोगों को पूछताछ के लिए उठाया है। स्थानीय ओवरग्राउंड वर्कर्स की तलाश तेज कर दी गई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य ने साफ कहा है कि इतना सामान सीमा पार से लाना लगभग नामुमकिन है। इससे यह साफ होता है कि आतंकी नेटवर्क ने लोकल सपोर्ट सिस्टम को मजबूत किया है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी आतंकी गुट अब “लो-इंटेंसिटी, हाई-विजिबिलिटी” मॉडल पर काम कर रहे हैं कम हिंसा, लेकिन ज्यादा खौफ। मकसद इलाके पर कब्जा नहीं, बल्कि कश्मीर में लौट रहे अमन, टूरिज्म और सामान्य हालात की हवा निकालना है।
एजेंसियां इसे सरहद पार से संचालित नरेटिव वॉर मान रही हैं, जहां गोली से ज्यादा उसकी गूंज मायने रखती है। किश्तवाड़ की यह मुठभेड़ उसी साजिश का हिस्सा बताई जा रही है। यह घटना ऐसे वक्त हुई है, जब अमरनाथ यात्रा और पीक टूरिस्ट सीजन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पहले से हाई अलर्ट पर थी। आंकड़े गवाह हैं कि ऐसी घटनाओं के बाद पर्यटक बुकिंग में 60 से 75 फीसदी तक गिरावट आ जाती है, होटल ऑक्यूपेंसी 70-80 से लुढ़ककर 25-30 फीसदी पर सिमट जाती है और टैक्सी, घोड़ा-खच्चर वालों से लेकर गाइड तक का रोजगार ठप हो जाता है। किश्तवाड़ में मिला यह अंडरग्राउंड ठिकाना साफ इशारा है जंग अब सिर्फ बंदूक की नहीं, दहशत और संदेश की भी है।