IAS News: कौन हैं सुबोध अग्रवाल? बिहार-झारखंड सहित कई ठिकानों पर ACB ने की थी छापेमारी, जानिए कैसे आया जल जीवन मिशन केस में नाम

IAS News: जल जीवन मिशन में कथित भ्रष्टाचार के आरोपी पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल कौन हैं? इनका नाम इस मामले में कैसे आया? आइए जानते हैं...

सुबोध अग्रवाल
कौन हैं सुबोध अग्रवाल? - फोटो : social media

IAS News:  IAS सुबोध अग्रवाल के बिहार-झारखंड सहित 15 ठिकानों पर हाल ही में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने छापेमारी की थी। वहीं अब इस मामले में नया मोड़ सामने आया है। पूर्व आईएएस अधिकारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। दरअसल, राजस्थान में जल जीवन मिशन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में आपराधिक याचिका दायर की है। अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए आगामी दिनों में इस पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है।

क्या है मामला 

दरअसल, जल जीवन मिशन में कथित अनियमितताओं को लेकर एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने सुबोध अग्रवाल सहित कई अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। एजेंसी का आरोप है कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में बड़े स्तर पर गड़बड़ियां की गईं, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। जांच के दौरान उनकी भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद उन्हें आरोपी बनाया गया और गिरफ्तारी की आशंका के बीच लुक-आउट नोटिस भी जारी किया गया।

पूर्व आईएएस ने किया एफआईआर

अपनी याचिका में सुबोध अग्रवाल ने आरोपों को निराधार और दुर्भावनापूर्ण बताया है। उनका कहना है कि बिना ठोस साक्ष्यों के उन्हें मामले में फंसाया गया है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया है कि एसीबी द्वारा दर्ज एफआईआर को रद्द किया जाए और उनके खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि जांच एजेंसी ने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया है और उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

कौन हैं सुबोध अग्रवाल

सुबोध अग्रवाल राजस्थान कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों में गिने जाते रहे हैं। वे राज्य सरकार में वित्त, उद्योग, ऊर्जा और जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदार पदों पर कार्य कर चुके हैं। लंबे प्रशासनिक अनुभव और प्रभावशाली छवि के कारण वे सरकार के भरोसेमंद अधिकारियों में शामिल रहे हैं। हालांकि, जल जीवन मिशन से जुड़े इस प्रकरण ने उनके प्रशासनिक करियर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसीबी की कार्रवाई के बाद उन्होंने कानूनी राहत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है। अब अदालत में होने वाली सुनवाई इस मामले की दिशा तय करेगी।

फैसले पर टिकी निगाहें

राजस्थान के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में इस मामले को बेहद अहम माना जा रहा है। यदि हाईकोर्ट से उन्हें राहत मिलती है तो यह उनके लिए बड़ी कानूनी जीत होगी। वहीं, यदि एसीबी की कार्रवाई को सही ठहराया जाता है तो उनकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। फिलहाल सबकी नजर हाईकोर्ट के आगामी फैसले पर टिकी है।