Bihar News : आरा में पुलिसिया चालान से परेशान ऑटो चालक ने की आत्मदाह की कोशिश, पेट्रोल छिड़ककर खुद को लगाई आग

Bihar News : आरा में पुलिसिया चालान से परेशान ऑटो चालक ने ख़ुदकुशी की कोशिश की. जिसके बाद अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है......पढ़िए आगे

Bihar News : आरा में पुलिसिया चालान से परेशान ऑटो चालक ने की
खुदकुशी की कोशिश - फोटो : SOCIAL MEDIA

ARA : बिहार के भोजपुर जिले की कलेक्ट्रेट और कचहरी रोड के पास आज उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब पुलिस द्वारा भारी-भरकम चालान काटे जाने से क्षुब्ध एक ऑटो चालक ने खुदकुशी की कोशिश की। पीड़ित चालक ने विरोध स्वरूप अपने शरीर पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा ली। मौके पर मौजूद लोगों और पुलिसकर्मियों ने आनन-फानन में आग बुझाई और चालक को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। इस घटना के बाद से पूरे शहर के ऑटो चालकों में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है।

ऑटो चालक संघ के जिलाध्यक्ष किरण प्रसाद ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिले में बिना किसी ठोस कारण के ऑटो चालकों का 8 हजार से 10 हजार रुपये तक का भारी-भरकम चालान काटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस की इस मनमानी के कारण चालकों का सड़कों पर वाहन चलाना दूभर हो गया है। किरण प्रसाद के अनुसार, भारी जुर्माने की इस कार्रवाई से चालकों में दहशत का माहौल है और वे आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट चुके हैं।

संघ के अध्यक्ष ने ऑटो चालकों की व्यथा साझा करते हुए बताया कि अधिकांश चालक गरीब परिवार से आते हैं और बैंक या फाइनेंस कंपनियों से लोन लेकर ऑटो खरीदते हैं। एक तरफ उन्हें हर महीने गाड़ी की किस्त (EMI) भरने की चिंता रहती है, तो दूसरी तरफ सड़कों पर निकलते ही भारी चालान का डर सताता रहता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि एक गरीब चालक की दिनभर की कमाई से ज्यादा का चालान काट दिया जाएगा, तो वह अपने परिवार का भरण-पोषण और लोन की भरपाई कैसे करेगा?

घटना के बाद ऑटो चालकों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और चेतावनी दी कि यदि चालान के नाम पर यह उत्पीड़न तुरंत बंद नहीं हुआ, तो जिले के सभी ऑटो चालक सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे। जिलाध्यक्ष ने साफ तौर पर कहा कि यह पहली बार नहीं है जब पुलिस ने इतनी बड़ी राशि का चालान काटा है; यह सिलसिला लंबे समय से जारी है जिससे तंग आकर आज एक चालक ने इतना खौफनाक कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा।

फिलहाल, घायल ऑटो चालक की स्थिति पर डॉक्टरों की नजर बनी हुई है। वहीं, जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मामले की जांच में जुट गए हैं। इस घटना ने एक बार फिर ट्रैफिक नियमों के पालन और मानवीय संवेदनाओं के बीच की बहस को छेड़ दिया है। प्रशासन अब इस कोशिश में है कि स्थिति को नियंत्रित किया जाए और चालकों के आक्रोश को शांत कर यातायात व्यवस्था सुचारू की जा सके।

आशीष की रिपोर्ट