Aurangabad News: पुलिस बल पर हुए हमले के बाद महिला - बच्चों की पिटाई मामले की जांच शुरु,आईजी एटीएस शालीन ने कहा-दोषी पुलिस कर्मियों को नपना होगा, पुलिस पर हमला करने वालों पर भी होगी कार्रवाई

Aurangabad News:औरंगाबाद जिले के गोह थाना क्षेत्र के सिंघाड़ी गांव में पुलिस द्वारा महिलाओं और बच्चों की पिटाई मामले की जांच मुख्यालय आईजी शालिन ने की, जिन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं और बच्चों की पिटाई करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होगी।

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महिला - बच्चों की पिटाई मामले की जांच शुरु- फोटो : Reporter

Aurangabad News:औरंगाबाद जिले के गोह थाना क्षेत्र के सिंघाड़ी गांव में पुलिस द्वारा महिलाओं और बच्चों की पिटाई मामले  की जांच मुख्यालय आईजी शालिन ने की, जिन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं और बच्चों की पिटाई करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होगी।

यह घटना तब हुई जब पुलिस ने रात करीब 2 बजे गांव में घुसकर एक पक्ष के लोगों पर हमला किया। इस हमले में न केवल पुरुषों को बल्कि महिलाओं और बच्चों को भी बुरी तरह से पीटा गया। कई लोग घायल हुए, जिनमें बुजुर्ग महिलाएं, किशोर और किशोरियां शामिल थीं। आईजी शालिनी ने कहा कि इस मामले में घायल हुए लोगों से जानकारी ली गई और उन्होंने न्याय का भरोसा दिलाया।

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बता दें पुलिस ने एक विशेष जाति के लोगों को निशाना बनाते हुए रात के 2 बजे घर का दरवाजा तोड़कर महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और किशोरियों की बेरहमी से पिटाई की। इस घटना के संबंध में पीड़ितों ने बिहार के डीजीपी से शिकायत की थी, जिसके बाद मामले की जांच शुरू की गई। एटीएस के आईजी शालीन ने बीती शाम सिंघाड़ी गांव का दौरा किया और घटना की जांच की। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में दोषी पुलिसकर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, कानून को अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने पहले दोनों पक्षों से घटना के बारे में जानकारी ली और फिर पुलिस द्वारा की गई बर्बरता के कारण घायलों के परिजनों से पूछताछ की। पीड़ितों ने एक स्वर में कहा कि पुलिस ने सभी सीमाएं पार कर दी हैं, दरवाजे और खिड़कियां तोड़ी गईं, अनाज को बर्बाद किया गया, और निर्दोष लोगों के साथ मारपीट की गई।

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आईजी ने बताया कि इस मामले की जांच रिपोर्ट डीजीपी को सौंपी जाएगी। उन्होंने एसपी को निर्देश दिया कि प्राथमिकी से निर्दोष लोगों का नाम हटाया जाए। यह मामला अब उच्च न्यायालय और मानवाधिकार आयोग तक पहुंच चुका है, जिससे इसकी गंभीरता बढ़ गई है।

रिपोर्ट- दीनानाथ मौआर