Bihar News : औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय में जिला जज समेत सात नए न्यायाधीशों ने संभाली कमान, लंबित वादों के निपटारे में आएगी तेजी
Bihar News : औरंगाबाद सिविल कोर्ट में सात नए जजों ने कमान संभाल ली है. इसमें जिला जज भी शामिल हैं. अधिवक्ताओं ने कहा की इससे लंबित वादों के निपटारे में तेजी आएगी......पढ़िए आगे
AURANGABAD : बिहार के औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय में न्यायिक व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। जिला जज (सप्तम) के रूप में संतोष कुमार झा समेत कुल सात न्यायाधीशों ने अपने नए पदों का कार्यभार संभाल लिया है। संतोष कुमार झा इससे पूर्व समस्तीपुर में जिला जज के पद पर तैनात थे। औरंगाबाद में जिला जज सप्तम निशित दयाल के हाजीपुर तबादले के बाद श्री झा की यहाँ नियुक्ति की गई है, जिससे जिले की न्यायिक प्रक्रिया में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है।
नए पदाधिकारियों की ज्वाइनिंग के साथ ही न्यायालय में कामकाज की गति तेज हो गई है। इसी कड़ी में अनीस कुमार ने एसीजेएम (ACJM) के पद पर योगदान दिया और तुरंत न्यायिक कार्यों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। इसके अतिरिक्त, प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी (JMFC) के रूप में पांच अन्य अधिकारियों—अभय सिंह, प्रेरणा सिंह, कुमार अभिजीत राय, सूरज प्रकाश और गीतांजलि—ने भी अपना पदभार ग्रहण कर लिया है। एक साथ सात न्यायाधीशों की नियुक्ति से औरंगाबाद कोर्ट में न्यायिक अधिकारियों की कमी काफी हद तक दूर हो गई है।
न्यायाधीशों के पदभार ग्रहण करने पर जिला विधिज्ञ संघ और अधिवक्ता संघ ने हर्ष व्यक्त करते हुए उनका स्वागत किया है। जिला विधिज्ञ संघ के अध्यक्ष विजय कुमार पाण्डेय, महासचिव जगनरायण सिंह, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष संजय कुमार सिंह और महासचिव सिद्धेश्वर विद्यार्थी ने संयुक्त रूप से बधाई दी। साथ ही लोक अभियोजक अजय कुमार, सरकारी अधिवक्ता वृजा प्रसाद और अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने भी नवागत न्यायाधीशों का अभिनंदन किया और उम्मीद जताई कि इससे न्याय की आस में बैठे वादियों को राहत मिलेगी।
अधिवक्ताओं का मानना है कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से व्यवहार न्यायालय में वर्षों से लंबित पड़े वादों की सुनवाई में काफी तेजी आएगी। विशेष रूप से दीवानी और फौजदारी मामलों के निपटारे में लगने वाले समय में कमी आएगी, जिससे आम जनता को त्वरित न्याय मिल सकेगा। नए अधिकारियों के आने से न्यायिक प्रशासन और वकीलों के बीच बेहतर समन्वय की भी आशा व्यक्त की जा रही है।
इस नई नियुक्ति का सबसे सकारात्मक प्रभाव आगामी 09 मई को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत पर पड़ने की संभावना है। औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय और दाउदनगर अनुमंडलीय न्यायालय में लगने वाली इस लोक अदालत की सफलता को लेकर अधिवक्ता काफी उत्साहित हैं। उनका कहना है कि पर्याप्त संख्या में न्यायाधीशों की उपलब्धता से सुलह-समझौते के आधार पर अधिक से अधिक मामलों का निपटारा किया जा सकेगा, जिससे लोक अदालत अपने लक्ष्यों को हासिल करने में सफल होगी।
दीनानाथ की रिपोर्ट