Bihar News: बगहा में अनोखी दीपावली, पेड़ों के साथ जलाए गए दीप, बिना पटाखों के दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
Bihar News: बिहार के बगहा में छोटी दीपावली के अवसर पर उत्सव का एक अनोखा और प्रेरणादायक नजारा देखने को मिला।...
Bihar News: बिहार के बगहा में छोटी दीपावली के अवसर पर उत्सव का एक अनोखा और प्रेरणादायक नजारा देखने को मिला। जहां आमतौर पर दीपावली पर पटाखों की गूंज और आतिशबाजी से आसमान रोशन होता है, वहीं यहां लोगों ने प्रकृति के साथ दीपोत्सव मनाकर पर्यावरण संरक्षण का खूबसूरत संदेश दिया। आईपीएस विकास वैभव चौराहा पर पर्यावरण प्रेमी गजेन्द्र यादव के नेतृत्व में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में न तो पटाखे फोड़े गए और न ही आतिशबाजी की गई। इसके बजाय लोगों ने पेड़ों के पास दीप जलाकर प्रकृति के प्रति अपनी श्रद्धा और जिम्मेदारी जाहिर की।इस अनूठी पहल ने लोगों को यह संदेश दिया कि त्योहार की असली खुशी शोर-शराबे और प्रदूषण में नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ मिलकर खुशियां बांटने में है।

प्रशासनिक अधिकारियों और SSB जवानों ने भी लिया हिस्सा
इस खास दीपोत्सव में प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर आम नागरिकों तक ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। कार्यक्रम में एसडीएम चांदनी कुमारी, एसडीपीओ निहार भूषण, सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवान और सैकड़ों स्थानीय लोग शामिल हुए।सभी ने पेड़ों के समीप दीप जलाकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। दीपों की रोशनी से पूरा परिसर जगमगा उठा। बिना पटाखों और आतिशबाजी के मनाया गया यह उत्सव लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।

पेड़ों को परिवार मानते हैं गजेन्द्र यादव, जीवन किया समर्पित
इस आयोजन की सबसे खास बात पर्यावरण प्रेमी गजेन्द्र यादव की अनूठी सोच और उनका प्रकृति के प्रति समर्पण है। उन्होंने अपना पूरा जीवन पेड़ों की सेवा और संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया है।गजेन्द्र यादव के लिए पेड़ केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि परिवार के सदस्यों की तरह हैं। यही वजह है कि वे दीपावली ही नहीं, बल्कि होली और रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक त्योहार भी पेड़ों के साथ मनाते हैं।उनकी यह पहल लोगों को प्रकृति से भावनात्मक रूप से जुड़ने और पेड़ों के महत्व को समझने की प्रेरणा देती है। उनका मानना है कि पर्यावरण की रक्षा केवल भाषणों और नारों से नहीं, बल्कि अपने व्यवहार में बदलाव लाकर की जा सकती है।
बिना पटाखों के त्योहार मनाने का दिया संदेश
दीपावली के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाता है। इसके साथ ही तेज आवाज से बुजुर्गों, बच्चों, मरीजों और पशु-पक्षियों को भी परेशानी होती है। ऐसे में बगहा में आयोजित यह कार्यक्रम एक सकारात्मक पहल के रूप में सामने आया।लोगों ने पेड़ों के पास दीप जलाकर यह संदेश दिया कि त्योहार को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से भी मनाया जा सकता है। इसके लिए खुशियों और परंपराओं से समझौता करने की जरूरत नहीं है, बल्कि उत्सव मनाने का नजरिया बदलना जरूरी है।

प्रकृति के साथ मनाएं त्योहार
बगहा का यह अनोखा दीपोत्सव सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति बचाने का संदेश भी है। गजेन्द्र यादव की वर्षों से चली आ रही यह परंपरा समाज को बताती है कि पेड़-पौधे हमारे जीवन का आधार हैं और उनकी रक्षा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।छोटी दीपावली पर बगहा में जले इन दीपों ने यह साबित किया कि रोशनी फैलाने के लिए पटाखों का शोर जरूरी नहीं है। पेड़ों के साथ मनाया गया यह उत्सव पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम बन गया।
रिपोर्ट- नागेंद्र प्रसाद भगत